कभी रसोइया, कभी प्लंबर... स्टॉक ट्रेडर निकला लश्कर आतंकी, 16 साल तक ऐसे दिया चकमा

16 साल से फरार एक आतंकी ने पहचान छुपाने के लिए रसोइया, प्लंबर, पेंटर से लेकर स्टॉक ट्रेडर तक का रूप धारण किया. श्रीनगर पुलिस की जांच में सामने आया यह चौंकाने वाला खुलासा बताता है कि कैसे देश के अलग-अलग राज्यों में घुलमिलकर उसने आतंकी गतिविधियों को कायम रखा.

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लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा की कहानी हैरान करने वाली है. (Photo: PTI) लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा की कहानी हैरान करने वाली है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • श्रीनगर/नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

श्रीनगर पुलिस की जांच में सामने आई एक चौंकाने वाली कहानी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है. रसोइया से लेकर प्लंबर, पेंटर, इलेक्ट्रीशियन और यहां तक कि स्टॉक ट्रेडर तक, एक आतंकी ने पहचान छुपाने के लिए ऐसे-ऐसे रूप बदले कि वह आम लोगों के बीच आसानी से घुलमिल गया.

ये कहानी लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा की है. उसे जम्मू-कश्मीर के बाहर हिंदुस्तान के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने बनाने का जिम्मा दिया गया था. उसने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए कई जगहों में रहकर कई पेशे अपनाए. पुलिस को कई ठिकानों का पता चला है.

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पुलिस जांच में राजस्थान, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में उसके ठिकानों का पता चला है. ये आतंकी पिछले 16 साल से फरार था. उसे एक अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद पकड़ा गया है. यह खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने एक ऑपरेशन में अब्दुल्ला समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया.

फर्जी पहचान और डिजिटल ट्रांजैक्शन

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, साल 2010 में अब्दुल्ला उत्तरी सीमा से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर आया था. राजस्थान में छोटे-मोटे काम करने के बाद उसने प्लंबिंग का काम शुरू किया. उसे इस काम की बुनियादी जानकारी पहले से ही थी, जो उसे पाकिस्तान में मिली थी. इसके बाद उसने अपना विस्तार शुरू किया.

'खरगोश' की मदद से बनाया आधार कार्ड

उसने सबसे पहले आतंक की दुनिया में 'खरगोश' के नाम से पहचाने जाने वाले उमर हैरिस से संपर्क किया. इसके बाद उसकी मदद से भारत में आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाने में सफल रहा. इससे उसे डिजिटल भुगतान लेने में आसानी हुई. वो स्थानीय लोगों के बीच और ज्यादा सामान्य नजर आने लगा.

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अमृतसर में ठिकाना बनाने की थी योजना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर का रहने वाला अब्दुल्ला पंजाबी भाषा में माहिर था. उसने अमृतसर में ठिकाना बनाने की योजना बनाई, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के डर से उसने यह कदम नहीं उठाया. राजस्थान और हरियाणा में पेंटर और इलेक्ट्रीशियन का काम करने के बाद उसने पंजाब के मलेरकोटला में बसने का फैसला किया. 

पंजाब के मलेरकोटला में बना ठिकाना

अब्दुला को मलेरकोटला में भाषा और माहौल दोनों अनुकूल लगे. उसने कुछ समय के लिए एक ढाबा भी चलाया, लेकिन उसमें ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ. इसी दौरान उसने यूट्यूब से शेयर ट्रेडिंग सीख ली. गिरफ्तारी के समय उसके खाते में 50 हजार रुपए से ज्यादा का मुनाफा था. वो दूसरों को निवेश के टिप्स भी देने लगा था.

आतंकी की बेटी से अब्दुला की शादी

इस महीने की शुरुआत में उसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया. उसके साथ एक और पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ खुबैब को भी पकड़ा गया. पूछताछ में देशभर, खासकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में बने ठिकानों की जानकारी सामने आई. जांच में सामने आया कि कश्मीर में एक आतंकी की बेटी से शादी कराई गई थी.

फर्जी दस्तावेजों के जरिए फैला नेटवर्क

यह नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है. 31 मार्च से शुरू हुए इस ऑपरेशन की निगरानी पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात कर रहे थे. इस कार्रवाई से आतंकी फंडिंग और वित्तीय पैटर्न का भी खुलासा हुआ. आतंकियों ने कई राज्यों में नेटवर्क खड़ा करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और पहचान का इस्तेमाल किया. 

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ऐसे खुला इस आतंकी नेटवर्क का राज

गिरफ्तार आतंकियों में श्रीनगर के नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा शामिल हैं, जो उन्हें पनाह और लॉजिस्टिक मदद दे रहे थे. 31 मार्च को पंडाच से नकीब भट की गिरफ्तारी के साथ इस नेटवर्क का खुलासा हुआ. उसके पास से पिस्तौल और आपत्तिजनक सामान मिला. उसने लश्कर से जुड़े होने की बात कबूल की थी.

A प्लस ग्रेड का आतंकवादी है अब्दुला

उसने ये भी खुलासा किया कि आदिल राशिद से हथियार लिए थे. जांच के दौरान श्रीनगर और आसपास के जंगलों में कई ठिकानों का पता चला. यहां से AK-47, आधुनिक राइफल, पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए. अब्दुल्ला और उसका साथी A+ ग्रेड के आतंकी थे. दोनों 16 साल पहले घुसपैठ कर भारत आए थे.

'अल फलाह मॉड्यूल' से जुड़ा कनेक्शन

दोनों अलग-अलग जिलों में सक्रिय रहे. इस दौरान उन्होंने लगभग 40 विदेशी आतंकियों को कमांड किया, जिनमें से ज्यादातर मारे जा चुके हैं. श्रीनगर पुलिस पहले ही नवंबर 2025 में 'अल फलाह मॉड्यूल' का भंडाफोड़ कर चुकी है. इस मॉड्यूल में पढ़े-लिखे पेशेवर, खासकर डॉक्टर शामिल थे, जिन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी बनाया गया था.

लाल किला के पास धमाके से जुड़ा तार

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इस मॉड्यूल का संबंध 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर हुए धमाके से भी था. इस हमले में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा था और वही विस्फोटक से भरी कार चला रहा था. इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि आतंकी नेटवर्क अब सिर्फ बंदूक और बारूद तक सीमित नहीं हैं.

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