बहावलपुर में लश्कर-जैश की गुप्त बैठक, हाफिज सईद का बेटा भी मौजूद, कहीं भारत पर बड़े हमले की साजिश...?

जैश के गढ़ में लश्कर के बड़े आतंकी नेताओं की बैठक के बाद भारत की खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं. खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये पहली बार इतने बड़े लेवल की बैठक हुई हैं जिसमें लश्कर और जैश ने एक साथ बैठक की है. 

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हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद जैश के इलाके में! आतंकी गठजोड़ की आशंका (File Photo) हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद जैश के इलाके में! आतंकी गठजोड़ की आशंका (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

क्या लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद अब एक साथ आ चुके हैं? क्या ये मिलकर भारत के खिलाफ किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं? भारतीय खुफ‍िया एजेंस‍ियां ऐसे कई सवालों का जवाब तलाशने में जुटी हैं. गौर करने वाली बात ये है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर और जैश दोनों के आतंकी संगठनों के मुख्य ठिकानों को भारतीय सेना ने तबाह कर दिया था. 

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इसके बावजूद, लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकियों की एक अहम बैठक पाकिस्तान के बहावलपुर में हुई जो जैश-ए-मोहम्मद का मजबूत गढ़ माना जाता है. बैठक में लश्कर के कई बड़े आतंकी जैसे हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद, लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी और हाफिज अब्दुल रऊफ मौजूद रहा. 

सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को ये सभी आतंकी बहावलपुर के एक बड़े मदरसे में इकट्ठा हुए. बैठक जैश के मुख्यालय 'मरकज सुभानअल्लाह' से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर हुई. खुफिया सूत्रों का ये भी कहना है कि लश्कर के आतंकियों की जैश के आतंकियों से मुलाकात भी हुई, हालांकि इस बैठक की तस्वीरें अब तक सामने नहीं आई हैं. 

भारत के लिए खतरा हैं दोनों संगठन 

LeT और JeM दोनों ने पहले भी भारत में भयानक आतंकवादी हमले किए हैं, इनमें लश्कर का 2008 का मुंबई हमला और जैश का 2001 का भारतीय संसद हमला जैसी घटनाएं दोनों के खौफनाक इतिहास का हिस्सा हैं. इसलिए खुफिया एजेंसियां ऐसे संकेतों को गंभीरता से ले रही हैं और अलर्ट जारी कर रही हैं ताकि किसी संभावित हमले के किसी प्लान को बनने से पहले उसे रोका जा सके. 

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर से एक्ट‍िव हुए जैश-लश्कर 

2025 में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस ऑपरेशन में दोनों संगठनों के ठिकानों में काफी हद तक तबाही हुई और कई बड़े आतंकी मार गिराए गए. लेकिन इसके बाद भी दोनों समूहों के अवशेष सक्रिय होने की कोशिशें देखने को मिलीं. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद दोनों संगठन अपने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने, बेहतर संगठनात्मक संरचना और लॉजिस्टिक सपोर्ट जुटाने की कोशिश में हैं. 

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