ईरान में जारी युद्ध के बीच भारत से, खासकर कश्मीर से, इंसानियत और एकजुटता की मिसाल सामने आ रही है. आम लोग युद्ध से प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए नकद, सोना और घरेलू सामान तक दान कर रहे हैं. इन भावुक कहानियों में एक कश्मीरी महिला की कहानी ने सभी को झकझोर दिया है, जिसने अपने दिवंगत पति की याद के तौर पर करीब 30 साल से संभालकर रखा सोना ईरान युद्ध पीड़ितों के लिए दान कर दिया. ये सोना महिला के पति ने उसे बतौर गिफ्ट दिया था.
भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने इस घटना को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए महिला और भारतीय लोगों का आभार जताया. ईरानी दूतावास ने लिखा, 'आपकी भावनाएं और आंसू हमारे लिए सबसे बड़ा सहारा हैं.' यह पहल कश्मीर घाटी में बड़े स्तर पर चल रहे मानवीय अभियान का हिस्सा है. बडगाम और अन्य शिया बहुल इलाकों में मस्जिदों के बाहर डोनेशन सेंटर बनाए गए हैं, जहां लोग ज्वेलरी, कैश, तांबे के बर्तन और यहां तक कि पशुओं तक का दान कर रहे हैं.
बडगाम के मोहसिन अली ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि मस्जिद 'इमाम जमान' में विशेष स्टॉल लगाकर यह अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'हमारी माएं और बहनें सोना, तांबा और नकद देकर ईरान के लोगों की मदद करना चाहती हैं.' इस अभियान में हर उम्र के लोग शामिल हैं. महिलाएं जहां आगे बढ़कर गहने और कीमती सामान दान कर रही हैं, वहीं बच्चे भी अपनी बचत और पॉकेट मनी दे रहे हैं.
युवा वॉलंटियर्स घर-घर जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ रहे हैं, खासकर ईद के बाद इसमें और तेजी आई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रयास केवल मदद नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सांझी पहचान का प्रतीक है. श्रीनगर के रैनावाड़ी निवासी एजाज अहमद के मुताबिक, 'ईरान पर थोपी गई इस जंग से भारी तबाही हुई है, ऐसे में दुनिया को आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए.'
ईरानी दूतावास द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गईं तस्वीरों में कश्मीर घाटी से डोनेशन में मिले नकद, गहनों और अन्य सामान के ढेर दिखाई दे रहे हैं. दूतावास ने कहा कि भारतीयों की यह दरियादिली हमेशा याद रखी जाएगी. बता दें कि 14 मार्च को ईरानी दूतावास ने भारतीयों से आर्थिक सहायता के लिए बैंक डिटेल शेयर किए थे, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब सीधे नई दिल्ली स्थित मिशन में कैश डोनेशन की अपील की गई है.
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