फिल्म स्टार्स या गायकों के फैंस के किस्से तो बहुत सुने होंगे लेकिन ये केस अपने आप में अनोखा है. इस घटना में 'डिल्यूजन' के शिकार जबलपुर के एक 32 वर्षीय युवक को लगा कि उसने किसी दूसरे सिंगर को सुना तो उसका मर्डर हो जाएगा. ये भ्रम उनके दिमाग में इस कदर हावी हो गया कि उन्होंने तीन बार सुसाइड का प्रयास किया. ये खबर जब मीडिया के जरिये कुमार सानू तक पहुंची तो उन्होंने मनोचिकित्सक को फोन करके अपने फैन का हालचाल पूछा और उसकी मदद के लिए भी पूछा. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
बता दें कि ये घटना 10-11 जनवरी को हुई. बिहार के छपरा का रहने वाला ये युवक नागपुर में काम करता था और ट्रेन से घर जा रहा था. रास्ते में अचानक उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई. उसने ट्रेन से कूदने की कोशिश की तो उसकी जान बचा ली गई. लेकिन फिर जबलपुर रेलवे स्टेशन के पब्लिक टॉयलेट में उसने ब्लेड से कलाई और गला काट लिया. पुलिस ने उसे बचाकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचाया. लेकिन वहां भी डर नहीं गया और इलाज के दौरान उसने अस्पताल की दूसरी मंजिल से कूदकर जान देने की कोशिश की. शुक्र है, उसकी जान बच गई और अब खतरे से बाहर है.
पुलिस पूछताछ में युवक ने बताया कि वो लंबे समय से कुमार सानू का कट्टर फैन है. लेकिन कुछ दिनों से सोशल मीडिया रील्स पर वो दूसरे सिंगर के गाने सुनने लगा था. यहीं से उसे भ्रम हो गया कि सानू के फैंस उसे 'धोखा देने वाला' मानकर ढूंढकर मार डालेंगे. GRP इंचार्ज संजीवनी राजपूत ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वो डर के मारे भाग रहा था. उसने रास्ते में कई स्टेशनों पर ट्रेन से उतरकर भागने की कोशिश की. फिलहाल मनोचिकित्सक समेत अन्य डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है.
डॉक्टर बोले- ये साइकोसिस है, जब झूठ पर अटूट विश्वास हो जाता है
इस घटना पर भोपाल के सीनियर साइकियाट्रिस्ट डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने कहा कि ये साइकोसिस का क्लासिक उदाहरण है. साइकोसिस में व्यक्ति के मन में फॉल्स, अनशेकेबल बिलीफ्स (झूठे, अटूट विश्वास) घर कर जाते हैं. व्यक्ति में डोपामाइन लेवल्स बढ़ने से विश्वास इतना कठोर हो जाता है कि कोई सबूत भी उसे नहीं झुका पाता. डर बेसिक सर्वाइवल इमोशन है, लेकिन ये डेल्यूजन में बदल जाए तो व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे मामलों में बिना ट्रीटमेंट के रिलैप्स का रिस्क 4-5 गुना बढ़ जाता है.
कुमार सानू ने डॉक्टर को फोन कर कहा- मदद करना चाहता हूं
युवक की खबर पढ़ने के बाद कुमार सानू ने डॉ. त्रिवेदी को व्यक्तिगत फोन किया. aajtak.in को डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने बताया कि सानू जी ने कहा है कि वे अपने फैंस को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं. इस घटना से उन्हें युवक की मानसिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता हुई. यही नहीं, उन्होंने साइकोसिस और डेल्यूजन समस्या के बारे में विस्तार से पूछा और कहा कि वो व्यक्तिगत स्तर पर अपने फैन की कैसे मदद कर सकते हैं. गायक ने अपना नंबर देकर कहा कि अगर किसी भी तरह की जरूरत हो तो बताएं, मैं हर संभव सहायता करूंगा.
डॉ. त्रिवेदी ने एक्स पर भी पोस्ट किया और लिखा कि कुमार सानू जी बेहद उम्दा इंसान हैं. खबर पढ़कर मुझे कॉल किया और फैंस की चिंता जताई. वे मदद के लिए तैयार हैं.
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स बोले- फैनडम अच्छा, लेकिन भ्रम बन जाए तो खतरा
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फैनडम में इमोशनल अटैचमेंट होना सामान्य बात है लेकिन जब ये डेल्यूजन में बदलने लगे तो सावधान हो जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग या ग्रुप प्रेशर से भी ये क्राइसिस बन सकता है. हमेशा परिवार को ऐसे लक्षण देखने चाहिए. असामान्य डर, अलगाव, बार-बार एक ही बात दोहराना जैसे लक्ष्ण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें.
मानसी मिश्रा