मिडिल ईस्ट तनाव पर संसद में घमासान के आसार, विदेश मंत्री आज दोनों सदनों में देंगे बयान

ईरान और US-इजरायल के बीच चल रही जंग का मुद्दा पार्लियामेंट सेशन में छाया रह सकता है. सरकार ने अपने नेताओं और मंत्रियों को बयान देते समय संयम बरतने की सलाह दी है, जबकि विपक्ष भारत की ऊर्जा जरूरतों और इस संकट की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है.

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ईरान-अमेरिका संघर्ष पर संसद में बहस संभव, सरकार ने नेताओं को संयम बरतने को कहा. (File Photo: ITG) ईरान-अमेरिका संघर्ष पर संसद में बहस संभव, सरकार ने नेताओं को संयम बरतने को कहा. (File Photo: ITG)

मंजीत नेगी / राहुल गौतम / हिमांशु मिश्रा

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  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:02 AM IST

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव की गूंज अब संसद में भी सुनाई दे सकती है. माना जा रहा है कि मौजूदा पार्लियामेंट सेशन के दौरान वेस्ट एशिया का संकट एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस संवेदनशील मामले पर बेहद सावधानी बरत रही है. सरकार ने अपने पार्टी नेताओं और मंत्रियों को सलाह दी है कि वे इस मुद्दे पर बयान देते समय संयम बरतें.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में इस संकट पर भारत का आधिकारिक रुख रखने की तैयारी कर रहे हैं. वो राज्यसभा में सुबह 11 बजे और लोकसभा में दोपहर 12 बजे अपना बयान देंगे. इससे पहले उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है.

भारत ने मानवीय चिंताओं को भी सामने रखा है. इसी के तहत मानवीय आधार पर ईरान के वॉरशिप IRIS लवन को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी गई है. सरकार का सतर्क रुख इस इलाके में भारत के बड़े रणनीतिक हितों से भी जुड़ा है. भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है. इसके अलावा खाड़ी देशों में लाखों भारतीय नागरिक काम करते हैं. 

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सरकार की चुप्पी की आलोचना

ऐसे में वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार इस मुद्दे पर बेहद संतुलित और सावधानी भरा रुख बनाए रखना चाहती है. दूसरी ओर विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से ज्यादा स्पष्ट रुख की मांग कर सकते हैं. कुछ विपक्षी नेताओं ने पहले ही इस संकट पर सरकार की कथित चुप्पी की आलोचना की है.

कांग्रेस ने तैयार की रणनीति 

हालांकि, माना जा रहा है कि सरकार अपने संतुलित रुख पर कायम रहेगी. राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की कोशिश करेगी. इसी बीच कांग्रेस ने भी संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर ली है. पार्टी की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटेजी ग्रुप की बैठक 10 जनपथ में हुई. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.

संसद में उठाए जाएंगे कई मुद्दे

इस बैठक के बाद कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने बताया कि पार्टी संसद में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे उठाएगी. उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया में जारी संकट और इसका भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाला असर संसद में उठाया जाएगा. इसके साथ ही इंडो-US ट्रेड डील का किसानों पर संभावित असर और देश के सामने खड़ी वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी.

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स्पीकर के खिलाफ विपक्ष

कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि संसद में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा भी उठाया जाएगा. इसके अलावा ग्रेट निकोबार आइलैंड को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के हालिया आदेश, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा. पार्टी ने यह भी कहा है कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष स्पीकर के खिलाफ वोट करेगा.

खड़गे ने ट्रंप को तानाशाह कहा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वेस्ट एशिया संकट और रूसी तेल सप्लाई पर अमेरिका के फैसले पर भारत के रुख को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तानाशाह कहा और आरोप लगाया कि पीएम उनके गुलाम की तरह काम कर रहे हैं. कर्नाटक के चित्तपुर में खड़गे ने कहा, ''वो (ट्रंप) एक तानाशाह हैं. मोदी उनके गुलाम हैं.''

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