जंग के बीच LPG लेकर भारत आ रहे दो और जहाज, ईरान ने होर्मुज पार करने की दी हरी झंडी

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर है. दो और एलपीजी टैंकर भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और जल्द ही इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर सकते हैं.

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ईरान ने दो और भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज पार करने की अनुमति दी. (File Photo) ईरान ने दो और भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज पार करने की अनुमति दी. (File Photo)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर 'पाइन गैस' और 'जग वसंत' पर्शियन गल्फ से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और जल्द ही युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर सकते हैं. जहाजों की ट्रैकिंग से पता चला है कि दोनों टैंकर ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच मौजूद थे, जहां वे अपनी पहचान वेरिफाई कराने के बाद होर्मुज पार करने की तैयारी में हैं.

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ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में शामिल हैं, जो पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद खाड़ी क्षेत्र में फंस गए थे. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए खाड़ी देशों का तेल और गैस दुनिया भर में पहुंचता है. इससे पहले 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नाम के दो जहाज करीब 92,712 टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंच चुके हैं, जो देश की लगभग एक दिन की रसोई गैस की जरूरत के बराबर है.

युद्ध शुरू होने के समय होर्मुज में कुल 28 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. हाल के दिनों में दोनों ओर से दो-दो जहाज सुरक्षित निकलने में सफल रहे हैं. शिवालिक 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि नंदा देवी 17 मार्च को कांडला पहुंचा. वहीं, ‘जग लाड़की’ नाम का तेल टैंकर 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा पहुंच चुका है. एक अन्य टैंकर ‘जग प्रकाश’ ओमान से अफ्रीका के लिए रवाना होकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुका है और तंजानिया की ओर बढ़ रहा है.

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अब भी 24 भारतीय जहाज युद्ध क्षेत्र में हैं

वर्तमान में 24 भारतीय जहाज अब भी युद्ध क्षेत्र में हैं, जिनमें से 22 पश्चिमी हिस्से में 611 नाविकों के साथ मौजूद हैं, जबकि दो पूर्वी हिस्से में हैं. इन 22 जहाजों में 6 एलपीजी टैंकर हैं, जिनमें से दो भारत के लिए रवाना हो चुके हैं. बाकी जहाजों में एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल उत्पाद ले जाने वाला जहाज, तीन कंटेनर शिप और दो बल्क कैरियर शामिल हैं. इसके अलावा एक ड्रेजर, एक खाली जहाज और तीन अन्य जहाज ड्राई डॉक में मरम्मत के लिए हैं.

पूरे पर्शियन (अरब) गल्फ में करीब 500 टैंकर अब भी फंसे हुए हैं. इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 ऑयल प्रोडक्ट टैंकर, 104 केमिकल/प्रोडक्ट टैंकर, 52 केमिकल टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं. ईरान जहाजों को जांच-परख के बाद ही होर्मुज पार करने की अनुमति दे रहा है. कई जहाज लारक-केश्म चैनल के रास्ते थोड़े बदलाव के साथ बाहर निकल रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान यह वेरिफाई कर रहा है कि जहाज किस देश के हैं, उनमें लदा कार्गो कहां जा रहा है और उन पर तैनात चालक दल के सदस्यों की राष्ट्रीयता क्या है.

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भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. देश लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. युद्ध से पहले भारत के आधे से अधिक कच्चे तेल का आयात सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होता था, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर हैं. एलपीजी की 85-95% और गैस की करीब 30% आपूर्ति इसी मार्ग से होती है. हालांकि कच्चे तेल की आपूर्ति को रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से संतुलित किया गया है, लेकिन गैस और एलपीजी की आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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