'बात नहीं बनी तो हम ट्रंप के हटने का इंतजार करेंगे', ट्रेड डील पर रुबियो से बोले थे NSA अजीत डोभाल

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर डोनाल्ड ट्रंप भले ही अपनी जीत का ढोल पीट रहे हों, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने कहानी पलट दी है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, भारत ने वाशिंगटन को साफ कर दिया था कि वह दबाव में झुकने के बजाय ट्रंप के कार्यकाल के खत्म होने तक का इंतजार करने को तैयार था.

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भारत-अमेरिका की ट्रेड डील को लेकर चौंकाने वाला खुलासा. (Image: File) भारत-अमेरिका की ट्रेड डील को लेकर चौंकाने वाला खुलासा. (Image: File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:22 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन गई है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी अमेरिकी लोगों के लिए बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहे हैं. लेकिन एक रिपोर्ट इन सभी दावों को पलट दिया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने ट्रंप के अड़ियल रवैए पर कड़ी आपत्ति जताई और ट्रेड डील न होने की सूरत में वह ट्रंप के कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा.

रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2025 की शुरुआत में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई एक निजी बैठक में भारत ने कड़ा रुख अपनाया था. डोभाल ने रुबियो से दो टूक कहा कि भारत डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों की धमकियों से डरने वाला नहीं है, अगर तल्खी कम नहीं होती तो वह व्यापार समझौते के लिए 2029 तक इंतजार कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक ये बैठक उस वक्त हुई थी, जब ट्रंप प्रशासन लगातार मोदी सरकार पर हमले कर रहा था और भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा रखा था, जो उस वक्त सबसे ज्यादा टैरिफ था.

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'बंद करें भारत की आलोचना'

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल ने मार्को रुबियो को याद दिलाया कि भारत ने अतीत में भी कई प्रतिकूल अमेरिकी प्रशासनों का सामना किया है. उन्होंने मांग की कि ट्रंप और उनके अधिकारी सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना बंद करें, ताकि रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाया जा सके.

'बुलिंग स्वीकार नहीं'

डोभाल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी तरह की 'बुलिंग' स्वीकार नहीं करेगा. इस बैठक के बाद ही सितंबर के अंत में ट्रंप के लहजे में थोड़ी नरमी देखी गई थी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी थी. रिपोर्ट दिल्ली के अधिकारियों के इनपुट पर आधारित है, जिन्होंने गोपनीयता की वजह से नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी.

क्यों बिगड़े रिश्ते

दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते तब तनावपूर्ण हो गए जब नई दिल्ली ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रंप के सीजफायर के दावों को झूठा करार दिया था. इसके बाद नवारो जैसे ट्रंप के करीबियों ने पीएम मोदी पर व्यक्तिगत तीखे हमले किए और रूसी तेल खरीदने के कारण यूक्रेन युद्ध को 'मोदी का युद्ध' बताया था. इसी कड़वाहट के बीच अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था.

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ट्रंप का बड़ा ऐलान

वहीं, रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए 'ट्रुथ सोशल' पर भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल होने का ऐलान कर दिया. हालांकि, पीएम मोदी ने बातचीत की पुष्टि तो की, लेकिन डील के विवरण के बारे में जानकारी नहीं दी.

भारत ने की पुष्टि

इसके बाद मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-यूएस ट्रेड डील की पुष्टि करते हुए केवल इतना कहा कि बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया है. ट्रंप इस डील को अमेरिकी किसानों की बड़ी जीत के रूप में बेच रहे हैं, जबकि भारत ने हमेशा कृषि और डेयरी सेक्टर को अपनी 'रेड लाइन' माना है.

उधर, डील की पूरी जानकारी सामने न आने से भारत में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. विपक्षी दल आरोप लग रहे हैं कि क्या भारत अमेरिकी दबाव में झुक गया है? लेकिन डोभाल और रुबियो की मुलाकात की रिपोर्ट ये संकेत देती है कि मोदी सरकार ने इस ट्रेड डील में बिना झुके समझौता किया होगा. दूसरी ओर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए ट्रंप इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं.

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