पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि खाड़ी क्षेत्र में रह रहे और काम कर रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में ईरान और खाड़ी देशों में बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील दोहराई.
विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि 28 फरवरी को शांति की अपील के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते गए हैं और रमजान के पवित्र महीने के दौरान भी संकट और गहरा हुआ है. मंत्रालय के मुताबिक, संघर्ष न केवल तेज हुआ है बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों तक भी फैल गया है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और सामान्य जीवन व आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. बयान में कहा गया कि भारत इस क्षेत्र का निकटवर्ती पड़ोसी है और उसकी शांति व स्थिरता में गहरी रुचि है.
भारत सरकार ने कहा है कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और उनकी सुरक्षा से जुड़ा कोई भी घटनाक्रम भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है. सरकार ने यह भी चेताया कि भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति इसी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर टिकी है और सप्लाई चेन में किसी बड़े व्यवधान का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. भारत ने व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों का कड़ा विरोध किया है. मंत्रालय ने बताया कि हालिया घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों की मौत हुई है या वे लापता हैं.
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विदेश मंत्रालय का बयान एक ऐसे भारतीय नाविक की मौत की ओर इशारा करता है, जो ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले में मारा गया. भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति पर जोर देते हुए सभी पक्षों से जल्द संघर्ष समाप्त करने की अपील की है. प्रभावित देशों में भारतीय मिशन प्रवासी भारतीयों और संगठनों के संपर्क में हैं और नियमित एडवाइजरी जारी कर रहे हैं. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान के सुल्तान सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर बात कर भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चर्चा की.
उन्होंने बहरीन के राजा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से भी बातचीत कर हालिया हमलों की निंदा की और क्षेत्रीय शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. पश्चिम एशिया में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और अस्थिर हो गए हैं.
शिवानी शर्मा