अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. इस बढ़ते संघर्ष ने मिडिल ईस्ट में रह रहे लगभग 9.7 मिलियन भारतीयों को जोखिम में डाल दिया है. हालात को देखते हुए भारत सरकार ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आपातकालीन योजनाएं सक्रिय कर दी गई हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे के बाद आज (रविवार) रात करीब 9:30 बजे दिल्ली लौटेंगे. लौटने के बाद वे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें मौजूदा हालात और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी.
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सेना और नौसेना अलर्ट पर, निकासी की तैयारी
सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना और नौसेना को स्टैंडबाय पर रखा है. जरूरत पड़ने पर हवाई मार्ग से निकासी की योजना तैयार है. वहीं समुद्री मार्ग से भी, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते, नागरिकों को सुरक्षित निकालने की संभावनाएं देखी जा रही हैं.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान, इजराइल और अन्य खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से बातचीत की है. उन्होंने भारत की गहरी चिंता जताते हुए संयम और कूटनीति पर जोर दिया है. क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों ने एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने, सतर्क रहने और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है.
खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय आबादी
मिडिल ईस्ट में भारतीय प्रवासी समुदाय काफी बड़ा है. संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 3.9 मिलियन, सऊदी अरब में 2.75 मिलियन, कुवैत में 1.01 मिलियन, कतर में 8.30 लाख, ओमान में 6.62 लाख और बहरीन में 3.47 लाख भारतीय रह रहे हैं.
सरकार इन सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए समन्वित प्रयास कर रही है. भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे लगातार अपडेट लेते रहें, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और भारतीय दूतावासों के संपर्क में रहें. सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेश में रह रहे नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है.
मंजीत नेगी