न सऊदी, न अमेरिका! भारत को तेल बेचने में इस देश ने मारी बाजी

मई के महीने में वेनेजुएला अचानक सऊदी अरब और अमेरिका को पछाड़कर भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है. यह बड़ा बदलाव साफ दिखाता है कि तेल की कम कीमतें और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रही उथल-पुथल किस तरह भारत की तेल खरीदने की रणनीति को पूरी तरह बदल रही है.

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मई में सऊदी अरब से भारत आने वाले तेल में बहुत भारी कमी आई है (File Photo) मई में सऊदी अरब से भारत आने वाले तेल में बहुत भारी कमी आई है (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार में एक बहुत बड़ा उलटफेर हुआ है. भारत को सबसे ज्यादा तेल बेचने वाले देशों की लिस्ट अचानक बदल गई है. इस बार न तो पारंपरिक सप्लायर सऊदी अरब बाजी मार पाया और न ही अमेरिका. बल्कि दुनिया के एक दूसरे देश ने इन दोनों देशों को पीछे छोड़ दिया है. वह मई के महीने में भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया है.

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ग्लोबल तेल बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच भारतीय कंपनियों ने इस देश से जमकर सस्ता तेल खरीदा है. एनर्जी कार्गो ट्रैकर केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, इस देश का नाम वेनेजुएला  है. इस देश ने मई महीने में भारत को हर दिन करीब 4 लाख 17 हजार बैरल कच्चे तेल की सप्लाई की है. यह आंकड़ा अप्रैल में सिर्फ 2 लाख 83 हजार बैरल था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इससे पहले पिछले लगातार 9 महीनों तक वेनेजुएला से भारत को कच्चे तेल की कोई सप्लाई नहीं हुई थी.

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सप्लाई में रुकावट की वजह से भारत ने अपनी तेल खरीदने की रणनीति बदल दी है. ऐसे में भारत के लिए वेनेजुएला एक बड़ा मददगार बनकर उभरा है. मई के महीने में भारत को तेल देने के मामले में अब केवल रूस (नंबर 1) और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE (नंबर 2) ही वेनेजुएला से आगे रहे हैं. बाकी सब पीछे छूट गए हैं.

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आखिर भारत क्यों खरीद रहा है वेनेजुएला से इतना तेल

इस बड़े बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह तेल की कीमत है. वेनेजुएला का कच्चा तेल दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले काफी सस्ता मिल रहा है. केप्लर के मुख्य एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक, भारतीय खरीदार हमेशा से वेनेजुएला का तेल पसंद करते रहे हैं, क्योंकि यह बजट में एकदम सही बैठता है. भारत में रिलायंस इंडस्ट्रीज इसकी सबसे बड़ी खरीदार है. वेनेजुएला का तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है, जिसे रिफाइन करना हर किसी के बस की बात नहीं है. लेकिन गुजरात के जामनगर में मौजूद रिलायंस की एडवांस रिफाइनरी इस तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है.

सऊदी अरब को कैसे लगा झटका?

दूसरी तरफ, भारत को सबसे ज्यादा तेल बेचने वाला सऊदी अरब अब पिछड़ गया है. फरवरी में ईरान संकट शुरू होने से पहले तक सऊदी अरब तीसरे नंबर पर मजबूती से टिका था. लेकिन मई में उसकी तेल सप्लाई घटकर करीब आधी रह गई है. अप्रैल में सऊदी ने भारत को हर दिन 6 लाख 70 हजार बैरल तेल दिया था, जो मई में घटकर सिर्फ 3 लाख 40 हजार बैरल रह गया है. जानकारों का कहना है कि सऊदी का तेल महंगा था, इसलिए भारतीय कंपनियों ने उसे छोड़ वेनेजुएला के सस्ते तेल को चुन लिया.

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इस उथल-पुथल के बीच इराक और ईरान से आने वाले तेल को भी बड़ा झटका लगा है. हालांकि मई में इराक से कुछ तेल की सप्लाई फिर शुरू हुई, लेकिन मात्रा पहले के मुकाबले काफी कम रही. फरवरी में इराक से भारत हर दिन लगभग 9 लाख 69 हजार बैरल तेल खरीद रहा था, जो मई में घटकर सिर्फ 51 हजार बैरल रह गया है. वहीं ईरान से अमेरिकी पाबंदियों में ढील के बाद अप्रैल में 7 साल बाद दोबारा तेल खरीदा गया था, लेकिन अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के चलते मई में ईरान से सप्लाई फिर से पूरी तरह ठप हो गई है.

आज भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा तेल का इस्तेमाल होता है. देश में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी काफी कमजोर हुआ है और महंगाई का खतरा लगातार मंडरा रहा है. ऐसे मुश्किल समय में वेनेजुएला से मिल रहा यह सस्ता तेल भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को भारी घाटे से बचाने में बड़ी राहत दे रहा है.
 

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