क्रैश नहीं हुआ वायुसेना का तेजस विमान, बस मामूली... HAL ने बताया सच, जानें पूरा मामला

HAL ने तेजस विमान के कथित क्रैश की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए बताया कि यह केवल जमीन पर हुई एक मामूली तकनीकी घटना थी. वायुसेना के साथ मिलकर घटना की जांच जारी है. Mk1A विमान के तीन प्रमुख परीक्षण सफल होने के बाद ही इसे सेवा में शामिल किया जाएगा.

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तेजस जेट के क्रैश होने की खबरों पर HAL ने किया खंडन (Photo: PTI) तेजस जेट के क्रैश होने की खबरों पर HAL ने किया खंडन (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

रविवार को ऐसी खबरें आईं थी कि भारतीय वायु सेना का लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस क्रैश हो गया है. बताया गया कि यह तीसरा तेजस विमान रहा, जो कि क्रैश हो गया. हालांकि, अब इस पूरे मामले पर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने सोमवार को बयान जारी किया है. HAL ने बताया है कि तेजस जेट क्रैश नहीं हुआ है. HAL ने यह भी कहा कि तेजस का सुरक्षा रिकॉर्ड दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर विमानों में बेहतरीन माना जाता है.

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HAL ने बताया कि इस घटना का विश्लेषण वायुसेना के साथ मिलकर स्टैंडर्डज़ेड प्रोसीजर के तहत किया जा रहा है. यह घटना ज़मीन पर हुई एक छोटी सी टेक्निकल घटना थी. यह सफाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना इस महीने की शुरुआत से अपने तेजस बेड़े की टेक्निकल जांच बढ़ा चुकी है, खासकर तीसरे तेजस विमान के नुकसान के बाद, जिसमें विमान लैंडिंग के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था लेकिन पायलट सुरक्षित था. इससे पहले मार्च 2024 और नवंबर 2023 में भी तेजस के दो अन्य हादसे हो चुके हैं.

अब फोकस लंबे समय से लंबित Mk1A कार्यक्रम पर है. भारतीय वायुसेना अप्रैल में तेजस Mk1A का मूल्यांकन करेगी, जिसके बाद ही इसे फ्रंटलाइन सेवा में शामिल करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा. 

IAF की सख्त समीक्षा से पहले HAL की सफाई (Photo: X/@HALHQBLR)

यह भी पढ़ें: गहन जांच के बाद ही फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन में शामिल होंगे तेजस विमान, हादसों के बाद एयरफोर्स का फैसला

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सूत्रों के अनुसार, तीन प्रमुख क्षमताओं का सर्टिफिकेशन जरूरी है - एयर टू एयर और एयर टू ग्राउंड मिसाइल फायरिंग ट्रायल, रडार और ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का समेकन, और वेपन डिलीवरी सिस्टम की पूरी जांच.

HAL ने बताया है कि अभी तक पांच Mk1A विमान तैयार हो चुके हैं, लेकिन वायुसेना की स्वीकृति के बाद ही इन्हें स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा. वर्तमान में यह कार्यक्रम लगभग दो साल से पीछे चल रहा है, जिसमें इंजन सप्लाई में देरी को बड़ा कारण माना जा रहा है.

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