'ECI के चयन पैनल में CJI का होना जरूरी नहीं', सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार ने हलफनामे में स्पष्ट कहा है कि चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है, ये पूरी तरह संसद का विधायी विकल्प है.

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Supreme Court. (File photo: ITG) Supreme Court. (File photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नी दिल्ली,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:20 PM IST

केंद्र सरकार ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें सरकार ने स्पष्ट किया है कि ECI की चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या किसी न्यायिक जज को शामिल करने की कोई अनिवार्यता संविधान में नहीं दी गई है. सरकार ने कहा कि ये एक विधायी विकल्प है, न कि संवैधानिक आवश्यकता.

केंद्र के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 324 (2) के तहत निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. इस संवैधानिक प्रावधान के आधार पर सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की वैधता का बचाव किया है. वर्तमान में न्यायालय के समक्ष इस नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं विचाराधीन हैं, जिनमें चयन पैनल की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं.

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में तर्क दिया है कि मूल रूप से संविधान में चयन समिति का कोई विशेष ढांचा निर्धारित नहीं किया गया था और इसे संसद के विवेक पर छोड़ दिया गया था. लगभग 75 साल तक देश में सरकारों के स्तर पर ही ये नियुक्तियां होती रहीं.

इसके बाद साल 2023 में नया कानून बनाकर एक औपचारिक चयन समिति का गठन किया गया. इस वर्तमान समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं.

न्यायिक भागीदारी के मुद्दे पर अपना रुख कड़ा करते हुए सरकार ने कहा कि आयोग की स्वतंत्रता जजों की मौजूदगी से तय नहीं होती, बल्कि ये सदस्यों की कार्यप्रणाली पर निर्भर करती है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2023 के एक फैसले में चयन पैनल में सीजेआई को शामिल करने का निर्देश दिया था. बाद में संसद ने नया कानून बनाकर सीजेआई की जगह केंद्रीय मंत्री को पैनल में शामिल कर लिया, जिसे अब अदालती चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

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