प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपनी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ईडी ने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर कहा है कि आई-पैक से जुड़े कोयला घोटाले की जांच के दौरान राज्य सरकार और पुलिस ने उसके काम में दखल दिया. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.
ईडी का कहना है कि आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कानूनी रूप से तलाशी लेने और जरूरी दस्तावेज जब्त करने से रोका गया. एजेंसी का आरोप है कि वरिष्ठ राज्य अधिकारियों की मौजूदगी में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जबरन वहां से हटा दिए गए. ईडी के मुताबिक यह न्याय में बाधा डालने जैसा है और इससे उसकी निष्पक्ष जांच प्रभावित हुई है.
ममता सरकार ने दाखिल किया कैविएट
इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया था, ताकि ईडी को कोई भी राहत देने से पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाए. यह विवाद कोलकाता में आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी से जुड़ा है, जो कथित करोड़ों रुपये के कोयला घोटाले की जांच का हिस्सा थी. ईडी का दावा है कि करीब 10 करोड़ रुपये की अपराध से जुड़ी रकम हवाला के जरिए आई-पैक तक पहुंचाई गई थी और गोवा विधानसभा चुनाव 2022 में तृणमूल कांग्रेस के लिए सेवाओं के बदले भुगतान किया गया था.
ईडी ने HC से की एफआईआर दर्ज करने की मांग
इससे पहले ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई 14 जनवरी के बाद तक टाल दी गई. तृणमूल कांग्रेस और आई-पैक ने ईडी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जब्त किए गए दस्तावेज सिर्फ चुनावी रणनीति से जुड़े थे और मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में नहीं आते. अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और ईडी ने दलील दी है कि अगर अदालत का संरक्षण नहीं मिला तो कई राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों का स्वतंत्र रूप से काम करना मुश्किल हो जाएगा.
सृष्टि ओझा / संजय शर्मा