वेनेज़ुएला का तेल बना विवाद: ट्रंप की सख्ती के पीछे ड्रग्स की लड़ाई या तेल का खेल? जानिए

अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर ड्रग्स तस्करी का आरोप लगाकर नौसेना भेज दी है लेकिन असली कहानी इसके विशाल तेल भंडार से जुड़ी है. चीन ने अरबों डॉलर निवेश कर रखा है और भारत भी कभी अपने तेल का 10% यहीं से लाता था. अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद सप्लाई ठप है. सवाल यही है कि क्या ये लड़ाई ड्रग्स के खिलाफ है या तेल पर कब्जे की जंग?

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तेल की जंग में घिरा वेनेज़ुएला, अमेरिका के प्रतिबंध और चीन का अरबों डॉलर का निवेश (Photo: Reuters/File) तेल की जंग में घिरा वेनेज़ुएला, अमेरिका के प्रतिबंध और चीन का अरबों डॉलर का निवेश (Photo: Reuters/File)

सम्राट शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

ट्रंप प्रशासन अब वेनेजुएला पर दबाव बढ़ा रहा है. वजह के तौर पर अमेरिका ने ड्रग्स का मुद्दा उठाया है. अमेरिकी नौसेना वेनेजुएला की ओर बढ़ चुकी है. वहीं दूसरी तरफ़, वेनेजुएला ने राजनीतिक कैदियों को रिहा किया है और सीमा पर सैनिक तैनात कर दिए हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या अमेरिका की चिंता सिर्फ ड्रग्स तक सीमित है?

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चीनी निवेश और तेल का खेल

वेनेजुएला के 90% तेल की आपूर्ति चीन को जाती है. साल 2026 के अंत तक चीन ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में 1 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है. वेनेजुएला की तेल कंपनी Petrolera Sinovensa में चीन की 50% हिस्सेदारी है. सााल 2007 से अब तक चीन ने 50 अरब डॉलर का तेल-बदले-ऋण (oil-for-loans) सौदा किया है.

चीनी पैसा

चीन दुनिया भर में विकास और कारोबारी प्रोजेक्ट्स में लगातार निवेश कर रहा है. 2000 से 2021 के बीच उसका कुल निवेश 2.7 ट्रिलियन डॉलर रहा, यह आंकड़ा है AidData अमेरिका की William & Mary यूनिवर्सिटी की रिसर्च लैब का. इस दौरान सबसे ज्यादा निवेश रूस ($241.31 बिलियन) में हुआ. दूसरे नंबर पर था वेनेजुएला ($212.28 बिलियन). इसके बाद अर्जेंटीना, इंडोनेशिया और पाकिस्तान का नंबर आता है.

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सब कुछ तेल पर टिकावेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं. इसके बाद नंबर आता है सऊदी अरब, कनाडा, ईरान और इराक का. ये आंकड़े हैं Statistical Review of World Energy 2021 के. वेनेजुएला के पास लगभग 48 हजार मिलियन टन तेल का भंडार है.

भारत और वेनेजुएला

अमेरिका पहले ही रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगा चुका है. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदारों में है और वेनेजुएला जैसे देशों के लिए एक बड़ा मार्केट बन सकता है. भारतीय सरकारी रिपोर्ट बताती है कि हाल के वर्षों में वेनेजुएला का ज्यादातर तेल एशियाई देशों खासतौर पर चीन और भारत को गया है, जिनके पास वेनेजुएला के अतिरिक्त-भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है.

साल 2015 और 2016 में भारत की कुल तेल आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी 10% से ज्यादा थी. लेकिन अमेरिकी पाबंदियों के बाद यह अब घटकर सिर्फ 1% रह गई है.

चीन का निवेश, अमेरिका की सजा

वेनेजुएला में जहां चीन का भारी निवेश है, वहीं ये देश अमेरिका की सख्त पाबंदियों से भी जूझ रहा है. अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ ने मिलकर अब तक लगभग 350 प्रतिबंध (sanctions) लगाए हैं. ये आंकड़े हैं Atlantic Council के इनमें से ज्यादातर पाबंदियां 2016 के बाद लगाई गईं.

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करीब 44% अमेरिकी पाबंदियां वेनेजुएला के राजनीतिक नेताओं पर हैं. लगभग 79% पाबंदियां सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों पर हैं. करीब 10.4% पाबंदियां आर्थिक नेताओं पर लगाई गई हैं.

अमेरिकी प्रतिबंधों में से लगभग 44 प्रतिशत वेनेजुएला के व्यक्तियों पर हैं, जिनमें से 79 प्रतिशत सुरक्षा और खुफिया कर्मियों पर, और 10.4 प्रतिशत आर्थिक अभिजात वर्ग पर हैं.

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