आंखों देखी: दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल का HC जज पर पक्षपात का आरोप, बोले- मुझे न्याय नहीं मिलेगा

दिल्ली शराब नीति मामले में नया मोड़ आया है. AAP संयजोक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी पैरवी की. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ पर अविश्वास जताते हुए मामले की सुनवाई से अलग होने (रिक्यूजल) की मांग की. केजरीवाल ने दलील दी कि अदालती फैसलों से उनके मन में पूर्वाग्रह का डर बैठ गया है.

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केजरीवाल ने अदालत में रखी दलील. (photo: ITG) केजरीवाल ने अदालत में रखी दलील. (photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST

सोमवार दोपहर एक बजे से ही हम हाईकोर्ट में तैयार खड़े थे. निगाहें बार-बार गेट की ओर था, क्योंकि अरविन्द केजरीवाल आने वाले हैं अदालत के समक्ष अपनी दलील खुद रखने के लिए. दोपहर करीब एक बजे उनका काफिला हाईकोर्ट के गेट पर पहुंचा. काले स्लेटी और पीले रंग के मिक्स चेक की चिर परिचित ओवर साइज वाली शर्ट और स्लेटी पैंट के नीचे सैंडल पहने केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता के साथ गाड़ी से उतरे. वहां खड़े मीडिया के हुजूम में शामिल पार्टी के विश्वस्त कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया और काफिला आगे बढ़ा. उनकी लीगल टीम के सहयोगी कार्यकर्ता यानी वालेंटियर्स भी पीछे-पीछे चले और साथ में सबको साइड करते नीली हरी केमोफ़्लेज वर्दी में लकदक सुरक्षा कर्मी. मीडिया के कैमरे तो गेट से ही देखते रहे, क्योंकि उन्हें अंदर आने की इजाजत नहीं है. लेकिन हम रिपोर्टरों के मोबाइल ने लगातार कोर्ट की इमारत तक उनका साथ निभाया. केजरीवाल पत्नी सुनीता और सहयोगियों के साथ सीधे कोर्ट रूम में पहुंच गए. तब लंच ब्रेक था, लेकिन कोर्ट रूम भरा हुआ था. वकील, रिपोर्टर, तमाशबीन बने वकीलों के मुंशी, जूनियर सभी उत्सुकता से खदे थे. 

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कोर्ट का समय हुआ तो पहले कोर्ट मास्टर और स्टाफ आकर अपनी सीटों पर बैठे. फिर जजेज एंट्री गेट से निकले अर्दली ने मेज पर तेज थपकी दी. ये इशारा होता है जज आ रहे हैं. यानी बादब बामुलाहिजा होशियार... पलक झपकते ही जज साहिबा यानी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा भी कोर्ट रूम में डायस पर पहुंची. सब खड़े हुए! अदालत कक्ष में थोड़ी गहमा गहमी मची. जस्टिस शर्मा ने हाथ जोड़े और अपनी कुर्सी पर बैठी, जिनके खिलाफ केजरीवाल को अपने अविश्वास और आशंकाओं को दलील रखनी थी.

दलीलें काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में शुरू हुई. जस्टिस शर्मा ने कहा कि आप अपनी दलीलें खुद रखना चाहते हैं. हमने आपको इजाजत दी है. आप अपनी बात रखें.

उसके बाद केजरीवाल ने आबकारी घोटाला मामले में अपनी पैरवी खुद करते हुए निचली अदालत के आदेश को आधार बनाते हुए खुद को निर्दोष और बेदाग बताया. केजरीवाल ने कोर्ट को धन्यवाद दिया तो हंसते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि कोर्ट आपकी सेवा के लिए ही है.

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SG से मांगा सहयोग

केजरीवाल ने कहा कि वह जस्टिस शर्मा और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. इसके बाद उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी सहयोग मांगा. केजरीवाल बोले कि मैं यहां एक आरोपी के रूप में नहीं हूं. मुझे सम्मानपूर्वक आरोपमुक्त किया गया है. केजरीवाल ने डिस्चार्ज आदेश की कुछ पंक्तियां पढ़ते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश में कहा गया है कि सबूत संदेह की सीमा का खुलासा नहीं करते हैं.

कोर्ट ने केजरीवाल को बीच में ही टोकते हुए कहा कि आप अपनी दलील रिक्यूजल एप्लीकेशन पर ही सीमित रखें. हम आज आपके मामले की सुनवाई से अलग होने की याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं.

निचली अदालत के आदेश पर फोकस

इस पर निचली अदालत के आदेश पर केजरीवाल फोकस हुए. उन्होंने कहा कि उस अदालत के आदेश में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच पूर्व निर्धारित दिशा में आगे बढ़ी है. 9 मार्च को पहली बार कोर्ट में सुनवाई हुई थी, सिर्फ सीबीआई मौजूद थी. पक्षकारों की उपस्थिति के बिना. एकपक्षीय सुनवाई के बाद इस अदालत ने आदेश पारित किया. प्रथम दृष्टया यह आदेश कुछ मुद्दों पर गलत प्रतीत होता है, 4 महीने से अधिक की सुनवाई में निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को सुनवाई के कुछ ही क्षणों में इस अदालत ने उस आदेश को गलत घोषित कर दिया. मैं इस आदेश से हैरान था, अगर अदालत में पूर्वाग्रह है तो मैंने गलती की और क्या मुझे यहां न्याय मिलेगा. मैंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा कि मामले को स्थानांतरित किया जाए.

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जवाब में कहा गया है कि एक बार जब कोई मामला पीठ को सौंप दिया जाता है, तो मामले को हटाने का फैसला उक्त न्यायाधीश के पास होता है. इसलिए मैंने यहां एक आवेदन दायर किया है. निचली अदालत से बरी किए जाने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि महीनों की सुनवाई के बाद निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को कुछ ही मिनटों में उच्च न्यायालय ने 'गलत' करार दिया.

केजरीवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को गलत बताते हुए उन्हें सुने बिना ही पारित कर दिया गया. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नोटिस भी जारी किया गया था और आरोपियों के वकील ने अपना पक्ष भी रखा था. कोई एकतरफा आदेश नहीं आया.
केजरीवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से आशंका पैदा हुई है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा और क्या अदालत पक्षपाती है.

इस पर जस्टिस शर्मा ने पूछा कि क्या आपका इशारा राजनीतिक पक्षपात की ओर है?

केजरीवाल ने बीच में टोका तो जस्टिस शर्मा ने कहा अरे मुझे अपनी बात पूरी तो करने दो आप!

उन्हें समय-समय पर जवाब दाखिल करने के लिए समुचित समय दिया गया. कई बार तो तीन और छह महीने तक की मोहलत दी गई. केजरीवाल ने कोर्ट से कहा कि सुनवाई में अनुचित जल्दबाजी नजर आ रही है. दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी बात पूरी कर दी है. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मांग की है कि वो इस केस को सुनना बंद करें, क्योंकि उनके मन में केजरीवाल के खिलाफ पहले से राय बन चुकी है.

केजरीवाल ने फिर कहा कि जस्टिस शर्मा ने 'अधिवक्ता परिषद' के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. यह एक ऐसा संगठन है जो एक खास विचारधारा से जुड़ा है. केजरीवाल ने कहा कि AAP उस विचारधारा का खुलकर विरोध करती है. इसलिए उनके मन में यह डर है कि अगर जज उस विचारधारा की समर्थक हैं और मैं उसका विरोधी हूं तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?

जस्टिस शर्मा ने इस पर पूछा कि क्या उन्होंने उन कार्यक्रमों में कोई राजनीतिक या विचारधारा से जुड़ी बात की या वो सिर्फ कानूनी कार्यक्रम थे. वो वकीलों का संगठन है. बार और बेंच एक-दूसरे के कार्यक्रम में जाते हैं.

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गृह मंत्री के बयान पर उठाए सवाल

केजरीवाल ने एक टीवी कार्यक्रम का हवाला दिया जिसमें गृह मंत्री ने कथित तौर पर कहा था कि जब हाईकोर्ट का फैसला आएगा तो केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा. केजरीवाल ने कहा कि फैसला आने से पहले ही गृह मंत्री को यह कैसे पता चल गया कि फैसला उनके खिलाफ जाएगा? यह बात संदेह पैदा करती है.

केजरीवाल ने कहा कि पांच मामलों में देखा गया कि ED और CBI ने जो भी मांगा, इस अदालत ने लगभग हर बार वही माना. सिर्फ एक मामले में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि CBI मुझे जल्दी-से-जल्दी दोषी साबित करने की कोशिश में है और ये अदालत CBI की हर बात का समर्थन करती रही है.

केजरीवाल ने कहा कि इस अदालत ने कई ऐसी टिप्पणियां कीं जो किसी को दोषी ठहराने जैसी लगती थीं, जबकि उस वक्त अभी चार्जशीट यानी आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हुआ था. अपने खुद के मामले में उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी सही थी या नहीं, बस यही देखना था, लेकिन अदालत ने सिर्फ दो सुनवाइयों में ही पक्की राय बना ली.

'हाईकोर्ट ने कहा था भ्रष्ट'

उन्होंने कहा कि उन्हें अपना पक्ष ठीक से रखने का मौका भी नहीं मिला और अप्रूवर के बयान पर पांच मिनट की सुनवाई में ही भरोसा कर लिया गया.

केजरीवाल ने कहा कि इसी मामले में इसी अदालत ने उन्हें भ्रष्ट कहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया. इसी अदालत के तीन आदेश सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिए हैं. इससे साफ पता चलता है कि यह अदालत एकतरफा काम कर रही है. लिहाजा उनको ये मामला सुनने के बजाय इसकी सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए.

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तुषार मेहता का पलटवार

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जो मिसाल कायम करता है. वह अनुमानों और अनुचित आशंका के आधार पर है. यह पीठ को लगभग बदनाम करने के आधार पर है. एक वादी कैसे पीठ का चयन कर सकता है?

यदि न्यायाधीश पर ऐसी सुनवाई शुरू कर देते हैं, तो क्या इस देश का कोई न्यायाधीश निष्पक्ष रूप से निर्णय ले पाएगा?

केजरीवाल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट यानी निचली अदालत ने CBI के अधिकारी के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं. लेकिन हाई कोर्ट ने CBI के मांगने पर उन टिप्पणियों पर रोक लगा दी इसके अलावा ED तो मामले में पक्षकार भी नहीं थी फिर भी अदालत ने ED के पक्ष में आदेश दे दिया. वो भी सिर्फ सरकारी वकील तुषार मेहता के मुंह से कहने पर. यह अदालत ED और CBI के प्रति बहुत उदार रही है.

केजरीवाल ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े ऐसे ट्रेंड आए जो दिखाते हैं कि इस मामले में अदालत का टकराव है. इससे उनके मन में पक्षपात की आशंका और मजबूत हुई है.

जस्टिस शर्मा ने बीच में एक बात कही. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने वो मामले सुने थे उस वक्त ट्रायल कोर्ट का कोई आदेश नहीं था. ट्रायल कोर्ट की जांच तो अब होगी. यानी उनका कहना था कि उन्होंने सीमित दायरे में ही काम किया था.

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जस्टिस स्वर्णकांता ने की केजरीवाल की तारीफ

केजरीवाल ने अपनी दलील पूरी की तो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि आपने बहुत अच्छी बहस की. आप वकील भी हो सकते हैं. 

केजरीवाल ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि मैं जो कर रहा हूं, उसी में खुश हूं. इस पर मनीष सिसोदिया के वकील संजय हेगड़े ने भी मुस्कुराते हुए कहा कि हम भी यही कर रहे हैं. आप इस पेशे में आकर यहां प्रतिस्पर्धा न बढ़ाएं! इसके बाद केजरीवाल ने अपनी दलीलें खत्म कर जाने कि इजाजत मांगी. अदालत ने गर्दन हिलाई तो केजरीवाल ने हाथ जोड़े और कोर्टरूम से निकल गए. अन्य याचिकाकर्ताओं की बहस तो दिन छुपने तक चली, लेकिन अदालत कक्ष आधे से ज्यादा खाली हो चुका था और माहौल में फैली उत्तेजना को धूल भी बैठ गई थी.

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