कोविड: जब आखिरी सांस ले रही थी मुस्लिम महिला...तो हिन्दू डॉक्टर ने सुनाया कलमा

'मैने धीरे से मरीज के कान के पास कलमा पढ़ा और आंखें बंद कीं. जैसे ही मैंने कलमा पूरा पढ़ा, मरीज ने गहरी सांस ली और मॉनिटर पर लाइन फ्लैट हो गई.'

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डॉ रेखा कृष्णा डॉ रेखा कृष्णा

गोपी उन्नीथन

  • तिरुवनंतपुरम ,
  • 23 मई 2021,
  • अपडेटेड 7:58 AM IST
  • लेडी डॉक्टर ने मुस्लिम मरीज को सुनाया कलमा
  • डॉक्टर बोलीं- सभी धर्मों का हो सम्मान

कोविड-19 से जुड़ी भयावहता की रिपोर्ट्स के बीच मानवता को सुकून देने वाली खबरों की भी कमी नहीं हैं. केरल की एक हिन्दू डॉक्टर ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है. डॉ रेखा कृष्णा पलक्कड के पट्टांबी में एक प्राइवेट अस्पताल में कोविड मरीजों के इलाज में जुटी हैं.  

सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती एक मुस्लिम महिला की कोविड-19 के साथ निमोनिया से भी पीड़ित होने की वजह से हालत नाजुक थी. महिला को दो हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती किया गया था. वो ICU में थी. कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की वजह से मरीज के रिश्तेदारों को पास जाने की अनुमति नहीं थी. 17 मई तक मरीज की तबीयत काफी बिगड़ गई और अहम अंगों ने काम करना बंद कर दिया. 

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ऐसे में अस्पताल की ओर से फैसला किया गया कि मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया जाए. मरीज की हालत ऐसी हो चुकी थी कि डॉक्टर्स कुछ ज्यादा नहीं कर सकते थे. मरीज के परिजनों को इस बारे में सूचित कर दिया गया. उस समय डॉ रेखा कृष्णा मरीज के पास मौजूद थीं. 

हिन्दू लेडी डॉक्टर ने मुस्लिम मरीज को सुनाया कलमा

डॉ रेखा ने बताया, मरीज का कोई रिश्तेदार पास मौजूद नही था, मुझे लगा कि उनके (मरीज) के लिए कुछ किया जाना चाहिए. क्योंकि मेरा बचपन संयुक्त अरब अमीरात में गुजरा है इसलिए मुझे मुस्लिम इबादत और रीतिरिवाजों की कुछ जानकारी है. मैने धीरे से मरीज के कान के पास कलमा पढ़ा और आंखें बंद कीं. जैसे ही मैंने कलमा पूरा पढ़ा, मरीज ने गहरी सांस ली और मॉनिटर पर लाइन फ्लैट हो गई.”   

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हालांकि डॉ रेखा ने इस घटना का किसी से जिक्र नहीं किया. बस उनके साथ हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ मुस्तफा को ही इसके बारे में जानकारी थी. डॉ मुस्तफा ने ही फेसबुक पर इसका जिक्र करते हुए पोस्ट लिखी. ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

डॉ रेखा ने कहा, कोई नहीं समझ सकता कि हम डॉक्टर्स किस दबाव से गुजर रहे हैं. हम अब इन मरीजों के परिवार ही बन गए हैं. 

डॉक्टर बोलीं- सभी धर्मों का सम्मान

डॉ रेखा के मुताबिक उनका जन्म केरल में हुआ लेकिन पालन-पोषण दुबई में हुआ. डॉ रेखा ने अपनी शिक्षा इंडियन एक्सेसिव फैकल्टी दुबई से की. उनके माता-पिता अभी भी दुबई में हैं. रिसर्च के मकसद से डॉ रेखा भारत आईं और केरल में ही बस गईं. उनके पति त्रिशूर में फिजिशियन हैं. डॉ रेखा का कहना है कि हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए. वे यही संदेश लोगों को देना चाहती हैं. 

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