चीन से तनाव के बीच भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया की बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

वार्ता के दौरान तीनों पक्षों ने आर्थिक और भू-सामरिक चुनौतियों और हिंद प्रशांत में सहयोग और खास तौर पर कोरोना महामारी के परिदृश्य और संकट से निपटने में घरेलू प्रतिक्रिया पर चर्चा की. मीटिंग में वैश्विक नौवहन के क्षेत्र में सहयोग और त्रिपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर व्यावहारिक गठजोड़ के संभावित क्षेत्रों के बारे में भी चर्चा की गई.

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विदेश सचिव हर्ष वर्द्धन श्रृंगला (फोटो-ANI) विदेश सचिव हर्ष वर्द्धन श्रृंगला (फोटो-ANI)

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST
  • पहली बार आपसी सहयोग बढ़ाने पर त्रिपक्षीय वार्ता
  • हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के दबदबे के बीच हुई चर्चा
  • क्षेत्रीय व वैश्विक बहुस्तरीय संस्थानों में संबंध पर चर्चा

भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को पहली बार आपसी सहयोग बढ़ाने के मुद्दे को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता की. डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक की सह अध्यक्षता विदेश सचिव हर्ष वर्द्धन श्रृंगला, यूरोप और विदेश मामलों के लिए फ्रांस के महासचिव फ्रांस्वां देलात्री और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों के विभाग के सचिव फ्रांसिस एडमसन ने की. हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य दबदबे के बीच भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने पर त्रिपक्षीय वार्ता के केंद्र में था.  

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वार्ता के दौरान तीनों पक्षों ने आर्थिक और भू-सामरिक चुनौतियों और हिंद प्रशांत में सहयोग और खास तौर पर कोरोना महामारी के परिदृश्य और संकट से निपटने में घरेलू प्रतिक्रिया पर चर्चा की. मीटिंग में वैश्विक नौवहन के क्षेत्र में सहयोग और त्रिपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर व्यावहारिक गठजोड़ के संभावित क्षेत्रों के बारे में भी चर्चा की गई. इसमें आसियान, इंडियन ओसन रिम एसोसिएशन और हिंद प्रशांत आयोग जैसे क्षेत्रीय संगठनों के जरिये सहयोग शामिल है.

तीनों देशों ने अपनी प्राथमिकताओं और चुनौतियों तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक बहुस्तरीय संस्थानों में चलन के बारे में विचारों का आदान प्रदान किया. इसमें बहुपक्षीयता को मजबूत बनाने और सुधार के बेहतरीन रास्तों के बारे में भी चर्चा की गई. 

विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि इस परिणामोन्मुखी बैठक के आयोजन का मकसद तीनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को प्रगाढ़ बनाना और अपनी ताकत को शांतिपूर्ण, समृद्ध, सुरक्षित और कानून के शासन पर आधारित हिन्द प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहा.

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