मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष लामबंद, आर-पार की तैयारी, अगले 48 घंटे अहम

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष ने महाभियोग का बिगुल फूंक दिया है. 193 सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है, लेकिन कानून के दांव-पेंच और प्रक्रियात्मक खामियों ने इस मिशन की राह कठिन कर दी है. अगले 48 घंटे देश की राजनीति में निर्णायक होने वाले हैं.

Advertisement
विपक्षी एकता की अग्निपरीक्षा, क्या राज्यसभा-लोकसभा में टिक पाएगा महाभियोग का प्रस्ताव? (File Photo: PTI) विपक्षी एकता की अग्निपरीक्षा, क्या राज्यसभा-लोकसभा में टिक पाएगा महाभियोग का प्रस्ताव? (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:08 PM IST

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है. उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी तेज है. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत करीब 14 दलों ने एकजुट होकर 193 सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लिए हैं. राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि दोनों सदनों से प्राप्त आदेश की प्रति में कई त्रुटियां हैं.

नियमों के मुताबिक, महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा के 100 या राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं. विपक्ष ने 193 हस्ताक्षर जुटाकर प्राथमिक बाधा तो पार कर ली है, लेकिन असली चुनौती प्रक्रिया के तकनीकी चरणों में छिपी है. विपक्षी खेमे में इस वक्त 300 से अधिक सांसदों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है.

Advertisement

इसमें RJD, AAP, NCP और वामपंथी दल भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने पूरी कार्यवाही को संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया है. उनका तर्क है कि महाभियोग के छह स्पष्ट चरण होते हैं, जिनका पालन नहीं किया गया है.

पहला चरण प्रस्ताव की जांच-परख, दूसरा चरण समिति का गठन, तीसरा आरोपों की तैयारी, चौथा समिति की रिपोर्ट, पांचवां संसद में रिपोर्ट पर चर्चा और छठा राष्ट्रपति का आदेश. सिंघवी ने कहा कि पीठासीन अधिकारी की भूमिका केवल प्रथम दृष्टया राय देने तक सीमित होती है. लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा किया जैसे एक 'मिनी ट्रायल' चला दिया हो. 

इसका मतलब है कि प्रस्ताव को पहले चरण में ही नकार दिया गया और आगे की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई. उन्होंने कहा, "पीठासीन अधिकारी का काम केवल प्राथमिक आधार देखना है, लेकिन प्रस्ताव को पहले ही चरण में ठप करके बाकी पांच चरणों का गला घोंट दिया गया है." महाभियोग को लेकर उठ रहे सवालों ने विपक्ष की मुश्किलों को बढ़ा दिया है. 

Advertisement

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करते रहे, तो संसद के पटल तक इसे ले जाना असंभव होगा. इसे कानून का 'मनमाना इस्तेमाल' करार देते हुए विपक्ष अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर घेरने की योजना बना रहा है. विपक्षी दल अगले दो दिनों में एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement