बजट में चाबहार पोर्ट के लिए फंडिंग नहीं, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच सरकार का बड़ा फैसला

बजट में चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया गया है. साथ ही बांग्लादेश को मिलने वाली सहायता में 50% की कटौती की गई है, जबकि भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका को सहायता जारी है. कुल विदेशी सहायता में 4% वृद्धि हुई है. भारत अमेरिका के साथ बातचीत कर विकल्प तलाश रहा है.

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बजट 2026 में चाबहार पोर्ट के लिए नहीं आवंटित किया गया फंड. (File Photo: ITG) बजट 2026 में चाबहार पोर्ट के लिए नहीं आवंटित किया गया फंड. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

बजट 2026-27 में भारत ने विदेशी विकास सहायता (ओवरसीज डेवलपमेंट असिस्टेंस) में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. इस बार बजट में चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कोई भी विशेष फंड आवंटित नहीं किया गया है जो ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बीच भारत की सतर्क नीति को दिखाता है. इसके अलावा बजट में बांग्लादेश को मिलने वाली सहायता में भी 50 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है.

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साथ ही बजट में पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता में भी बदलाव किया है. बांग्लादेश को भारतीय विदेशी सहायता में सबसे ज्यादा कटौती हुई- पिछले साल के 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया, यानी 50% की कमी. पिछले आवंटन में से केवल 34.48 करोड़ रुपये ही जारी किए गए थे. ये कटौती भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव को दर्शाती है, खासकर 2024 से जारी गिरावट के बीच.

दूसरी ओर भूटान भारत से सबसे अधिक सहायता प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है. उसके बाद नेपाल, मालदीव और श्रीलंका आता है. कुल मिलाकर, भारत की 'देशों को सहायता' मद में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अब बढ़कर 5,686 करोड़ रुपये हो गई है.

INSTC का अहम हिस्सा है चाहबार

चाबहार पोर्ट भारत और ईरान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को मजबूत करना है. दोनों देशों ने इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में शामिल करने की वकालत की है. INSTC एक 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोडल परिवहन प्रोजेक्ट है जो भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई को आसान बनाएगा.

वहीं, पिछले सालों में भारत ने ईरान के दक्षिणी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस प्रमुख कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए सालाना 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. लेकिन 2026-27 के बजट में इस मद के लिए शून्य आवंटन किया गया है. पिछले साल के संशोधित अनुमानों में ये राशि 400 करोड़ रुपये तक बढ़ाई गई थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह हटा दिया गया.

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ट्रंप की चेतावनी

बता दें कि सितंबर 2025 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत को चाबहार प्रोजेक्ट में भागीदारी के लिए छह महीने की छूट (वेवर) दी गई थी. ये छूट 26 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है. ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनी भी दी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले महीने कहा था कि भारत चाबहार से जुड़े मुद्दों पर वाशिंगटन के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न विकल्प तलाश रहा है.

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