रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आएंगे. क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने मंगलवार को इस हाई-प्रोफाइल यात्रा की पुष्टि की है. भारत और रूस के बीच गहराते रणनीतिक और रक्षा सहयोग के बीच पुतिन की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है.
खास बात यह है कि एक साल के भीतर यह उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी, जो दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्तों को दर्शाती है. पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे. उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यापक बातचीत हुई थी.
दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में इस बार वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है. क्रेमलिन ने मंगलवार को औपचारिक तौर पर पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा करने वाले हैं.
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. रक्षा सहयोग से लेकर ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मंचों पर समन्वय तक दोनों देशों के रिश्तों में लगातार विस्तार देखा जा रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने भारत का पहला दौरा किया था.
राष्ट्रपति पुतिन उससे पहले आखिरी बार 2021 में दिल्ली आए थे. भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन तंत्र लागू है. इसके तहत भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति हर साल द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा करते हैं. अब तक ऐसे 23 शिखर सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं, जो बारी-बारी से दोनों देशों में होते हैं.
पिछले शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक भू-राजनीतिक पर चर्चा की थी. भारत और रूस के बीच जारी उच्च-स्तरीय संपर्कों को इस यात्रा से और मजबूती मिलने की उम्मीद है. पुतिन की यह यात्रा रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हालिया भारत दौरे के कुछ ही दिनों बाद हो रही है.
सर्गेई लावरोव BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आए थे. 14 और 15 मई को आयोजित दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की थी. BRICS शिखर सम्मेलन में आर्थिक साझेदारी, वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना है.
शिवानी शर्मा