पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पांचवां पत्र भेजा है. मुख्यमंत्री ने तीन पन्नों की इस चिट्ठी में एआई-टूल्स के जरिए किए गए डिजिटाइजेशन और आंकड़ों में विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
दूसरी तरफ, मंगलवार को यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठा, जहां वकील ने राज्य के कई इलाकों में हिंसा की छह घटनाओं की पुष्टि करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि नोटिस जारी किया जा चुका है और अदालत इसे देखेगी.
ममता बनर्जी का आरोप है कि आयोग 2002 की सूची का हवाला देकर पिछले 23 साल की वैध कानूनी प्रक्रिया को नकार रहा है, जिससे पात्र मतदाताओं को भारी कठिनाई हो रही है.
एआई टूल्स और डेटा में विसंगति का आरोप
ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि 2002 के वोटर लिस्ट के डिजिटाइजेशन के लिए एआई-टूल्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मतदाताओं के विवरण में बड़ी विसंगतियां पैदा हो गई हैं. कई पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से 'तार्किक विसंगति' वाला बताकर 'Unmapped' चिह्नित कर दिया गया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, हजारों वोटरों ने पिछले दो दशकों में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने नाम जुड़वाए थे, जिन्हें अब नकारा जा रहा है.
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आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल
चिट्ठी में ममता ने सवाल किया कि क्या निर्वाचन आयोग अपने ही पिछले 20 साल के काम को गैर-कानूनी घोषित करना चाहता है. उन्होंने कहा कि 2025 की लिस्ट के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अधिकारियों को बिना वजह 2002 की प्रविष्टियों से क्रॉस-चेक करने का निर्देश दिया गया है. आयोग की टीम मतदाताओं को अपनी पहचान और योग्यता फिर से साबित करने के लिए मजबूर कर रही है, जो अनुचित है.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ने बंगाल में हिंसा का मुद्दा उठाते हुए इसे बिहार एसआईआर मामले के साथ सुनने का अनुरोध किया. कोर्ट को बताया गया कि राज्य के छह अलग-अलग हिस्सों में हिंसा हुई है. चीफ जस्टिस ने आश्वासन दिया कि इस मामले में नोटिस जारी हो चुका है, इसलिए अदालत इस पर विचार करेगी.
नलिनी शर्मा / संजय शर्मा