कभी विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर भेजी गई थी महिला, अब CAA के तहत मिली भारतीय नागरिकता

असम के कछार जिले की 59 वर्षीय देपाली दास को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता मिल गई है. खास बात यह है कि उन्हें 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर भेज दिया था, जहां उन्होंने करीब दो साल बिताए. अब वह असम की पहली ऐसी घोषित विदेशी बन गई हैं, जिन्हें डिटेंशन सेंटर से रिहाई के बाद नागरिकता मिली है.

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असम में महिला को मिली नागरिकता. (Photo: Representational) असम में महिला को मिली नागरिकता. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • गुवाहाटी,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

असम के कछार में एक ऐसी महिला को भारतीय नागरिकता मिल गई है, जिसे कभी विदेशी घोषित कर डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. 59 वर्षीय देपाली दास को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता दी गई है. वह असम की पहली ऐसी घोषित विदेशी हैं, जिन्हें डिटेंशन सेंटर में रहने और बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद CAA के तहत नागरिकता मिली है.

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एजेंसी के अनुसार, देपाली दास कछार के धोलाई विधानसभा क्षेत्र के हवैथांग इलाके की रहने वाली हैं. फरवरी 2019 में एक फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें अवैध प्रवासी घोषित कर दिया था. इसके बाद पुलिस ने 10 मई 2019 को उन्हें हिरासत में लेकर सिलचर के डिटेंशन सेंटर भेज दिया था. वह लगभग दो साल तक डिटेंशन सेंटर में रहीं. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 मई 2021 को उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.

देपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के दिप्पुर गांव की रहने वाली थीं. उनके वकील धर्मानंद देब के मुताबिक, उन्होंने 1987 में बांग्लादेश के हबीगंज जिले के पराई गांव के निवासी अभिमन्यु दास से शादी की थी. शादी के एक साल बाद 1988 में यह कपल भारत आ गया और असम के कछार जिले में रहने लगा.

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उनकी नागरिकता पर पहली बार 2013 में सवाल उठा, जब पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की. 2 जुलाई 2013 को पुलिस ने एक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कहा गया था कि देपाली दास बांग्लादेश के बानियाचोंग क्षेत्र की रहने वाली हैं और मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था.

खास बात यह है कि यही चार्जशीट बाद में उनकी नागरिकता के आवेदन में अहम सबूत बन गई. वकील धर्मानंद देब के अनुसार, CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करते समय यह साबित करना जरूरी होता है कि व्यक्ति बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से भारत आया है.

अधिकतर मामलों में लोग ऐसे दस्तावेज पेश नहीं कर पाते, लेकिन देपाली के मामले में 2013 की पुलिस चार्जशीट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि वह बांग्लादेश की निवासी थीं. इसी दस्तावेज को अधिकारियों ने वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार कर लिया.

साल 2021 में रिहा होने के बाद किया था आवेदन

साल 2021 में जमानत पर रिहा होने के बाद देपाली ने CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने का फैसला किया. जब 2024 में इस कानून के नियम लागू हुए, तब उन्होंने अपने वकील की मदद से आवेदन प्रक्रिया शुरू की.

उनकी पहली सुनवाई 24 फरवरी 2025 को सिलचर के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिस के दफ्तर में हुई, जिसे ऐसे आवेदनों की प्रक्रिया के लिए नामित किया गया है. इसके बाद दो और सुनवाई हुईं और सभी दस्तावेज ऑनलाइन गृह मंत्रालय को भेज दिए गए. मैदानी स्तर पर जांच के बाद उन्हें 25 मई 2025 को अंतिम बुलाया गया था. इसके बाद 6 मार्च 2026 को देपाली दास को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र मिल गया.

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सामाजिक कार्यकर्ता कमल चक्रवर्ती ने बताया कि देपाली के तीन बच्चे एक बेटा और दो बेटियां भारत में ही जन्मे हैं. भविष्य में अगर उनकी नागरिकता पर कोई सवाल उठता है तो वे अपनी मां के नागरिकता प्रमाणपत्र के आधार पर अपनी नागरिकता साबित कर सकेंगे.

असम में चार बांग्लादेशी नागरिकों को दी जा चुकी है नागरिकता

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 11 दिसंबर 2019 को संसद में पारित किया गया था. इस कानून के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग, जो 25 मार्च 1971 से 31 दिसंबर 2014 के बीच भारत आए हैं, भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं.

देपाली दास से पहले असम में चार बांग्लादेशी नागरिकों को CAA के तहत भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है, लेकिन वह पहली ऐसी महिला हैं, जिन्हें विदेशी घोषित किए जाने और डिटेंशन सेंटर में रहने के बाद नागरिकता मिली है.

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