TCS की HR हेड या BPO टेलीकॉलर ? अब तक फरार निदा खान को लेकर कंपनी ने खुद दिया बड़ा अपडेट

नासिक में TCS बीपीओ कांड में वहां की HR हेड बताई जा रही निदा खान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न जैसे मामलों की शिकायत के बाद से ही निदा खान फरार चल रही है. इस बीच  कंपनी के सूत्रों ने खुद निदा खान को लेकर कही जा रही बातों की सच्चाई सबके सामने रखी है. नौ एफआईआर में उसका नाम आरोपी के रूप में सामने आया है.

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टीसीएस कंपनी की एचआर हेड निदा खान को लेकर नई जानकारी सामने आई है (Photo: ITG) टीसीएस कंपनी की एचआर हेड निदा खान को लेकर नई जानकारी सामने आई है (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नासिक ,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:17 AM IST

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस (TCS) नासिक के बीपीओ सेंटर में हुआ कांड अब चर्चा का विषय बन गया है. ऑफिस के अंदर धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न जैसे मामले आने के बाद सबसे चर्चित नाम वहां की HR हेड बताई जा रही निदा खान का है. इस पूरी केस के खुलासे के बाद से ही वह फरार चल रही है. उसकी तलाश में महाराष्ट्र पुलिस और एसआईटी टीम लगी है. हालांकि अभी तक उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा है. इस बीच TCS की तरफ से निदा खान को लेकर कुछ जानकारियां दी गई है.

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टीसीएस से पूछे गए कुछ सवालों के जवाब में वहां से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक TCS सूत्रों का कहना है कि निदा खान वहां HR हेड या मैनेजर के तौर पर काम नहीं करती थी. वह वहां सिर्फ टेलीकॉलर के रूप में काम करती थी. नासिक में दर्ज नौ एफआईआर में पहली रिपोर्ट से ही निदा खान का नाम सामने आया था. आरोपों के मुताबिक, वह उन लोगों के समूह का हिस्सा थी, जिन पर महिला और पुरुष कर्मचारियों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं. मामले सामने आने के बाद से ही निदा खान फरार बताई जा रही है. महाराष्ट्र पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक उसका कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है. जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कई अहम पहलुओं से पर्दा उठ सकता है खासकर यह कि वह इस पूरे नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी.

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सिर्फ उत्पीड़न नहीं और भी बहुत कुछ 

एफआईआर में दर्ज आरोपों को देखें तो मामला केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित नहीं है. इसमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, जबरन धर्मांतरण के प्रयास और मानसिक दबाव जैसे गंभीर पहलू भी शामिल हैं. पीड़ितों के बयान के अनुसार, आरोपियों का एक संगठित समूह था, जो चुनिंदा कर्मचारियों को निशाना बनाता था. इस समूह में निदा खान की भूमिका को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं.

कैसे कपड़े पहनने हैं… आरोपों में दर्ज सारे निर्देश

एक एफआईआर में बताया गया है कि निदा खान कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को इस्लामी परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने और व्यवहार करने की सलाह देती थी. इतना ही नहीं, कुछ पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें धार्मिक तौर-तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित या दबाव भी डाला गया. इसमें नमाज पढ़ने, खान-पान की आदतों में बदलाव और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने जैसी बातें शामिल हैं. हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच चल रही है. लेकिन शुरुआती जांच में सामने आए ये तथ्य मामले को बेहद संवेदनशील बना देते हैं.

व्हाट्सएप ग्रुप और टारगेटिंग का आरोप

जांच में एक और अहम पहलू सामने आया है कि एक व्हाट्सएप ग्रुप भी इन लोनों ने बनाया था. पुलिस के अनुसार, इस ग्रुप के जरिए कुछ कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ गतिविधियां चलाई जाती थीं. पीड़ितों का दावा है कि निदा खान भी इस ग्रुप का हिस्सा थी. सूत्रों के मुताबक अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह मामला संगठित उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है.

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गिरफ्तारी का इंतजार, जवाब अधूरे

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ी कड़ी निदा खान पुलिस की पकड़ से बाहर है. जांच एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह सिर्फ एक सहयोगी थी या पूरे नेटवर्क की अहम संचालक. अब तक पुलिस इस मामले में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें छह पुरुष और एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों में दानिश शेख, तौसीफ अटार, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ अंसारी के नाम सामने आए हैं. इन सभी पर महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और जबरन धर्मांतरण के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, कंपनी ने भी इन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है.

हर आरोपों का दिया जवाब 

इस बीच, आरोपी शाहरुख की पत्नी ने आजतक से बातचीत में सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जिस तरह से मामले को पेश किया जा रहा है, वह हकीकत से काफी अलग है. शाहरुख की पत्नी का कहना है कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एफआईआर में आखिर लिखा क्या है. उनके मुताबिक, मैं बस यही कहना चाहूंगी कि जो एफआईआर में बातें कही गई हैं, उनमें कहीं भी धार्मिक परिवर्तन या कोई रैकेट चलाने जैसा आरोप नहीं है. उसमें सिर्फ इतना कहा गया है कि मजाक करते थे या बातचीत करते थे. उनका कहना है कि जिस तरह से इसे धर्मांतरण रैकेट के रूप में पेश किया जा रहा है, वह गलत है. ये सब फेक है.

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चार साल तक चुप क्यों रहीं?

उन्होंने कहा, अगर किसी के साथ इतना सब हो रहा था, तो उन्होंने पहले शिकायत क्यों नहीं की? कंपनी में मैनेजर, सीनियर अधिकारी होते हैं उन्हें क्यों नहीं बताया गया? उनका कहना है कि सीधे इतने बड़े आरोप लगाना और उसे मीडिया में इस तरह पेश करना सही नहीं है.

हमें कानून पर पूरा भरोसा 

उन्होंने कहा कि उनका परिवार जांच में पूरा सहयोग कर रहा है. हम कानून और संविधान पर भरोसा करते हैं. हमें यकीन है कि सच सामने आएगा और हमें न्याय मिलेगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनका परिवार मानसिक दबाव में है.

(पलक अग्रवाल की रिपोर्ट, नासिक से दिव्येश सिंह के इनपुट के साथ)

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