IIT बॉम्बे की रिटायर्ड अफसर को दिखाया CBI का डर, हड़प लिए ₹4 करोड़ 62 लाख

मुंबई पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ठगों ने आईआईटी बॉम्बे की एक पूर्व मेडिकल ऑफिसर को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस और सीबीआई गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 4.62 करोड़ रुपये हड़प लिए थे.

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यह ठगी अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई. (File Photo: Getty Image) यह ठगी अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई. (File Photo: Getty Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST

मुंबई पुलिस के वेस्टर्न रीजन साइबर सेल ने आईआईटी बॉम्बे की 74 साल की रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर से 4.62 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. साइबर क्राइम से जुड़े इस केस में नरेंद्र सिन्हा और गुंजन देवकुमार दिनेशचंद्र को गिरफ्तार किया गया है. इन दोनों आरोपियों ने साइबर अपराधियों को बैंक अकाउंट्स उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल पीड़िता से ली गई रकम को रखने और निकालने के लिए किया गया. 

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यह ठगी अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई, जिसमें जालसाजों ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी और आईपीएस अधिकारी बताकर पीड़िता को वीडियो कॉल किया. आरोपियों ने दावा किया कि महिला के आधार कार्ड का दुरुपयोग कर 6 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन किया गया है, जिसके बाद उन्हें सीबीआई गिरफ्तारी का डर दिखाया गया. 

घबराहट में महिला ने अपने फिक्स्ड और रिकरिंग डिपॉजिट समय से पहले तुड़वाकर अपराधियों के बताए अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर कर दिए. पुलिस ने पैसे के लेन-देन (मनी ट्रेल) की जांच के बाद इन दोनों मददगारों को दबोच लिया है.

वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' का जाल

धोखाधड़ी की शुरुआत एक वीडियो कॉल से हुई, जिसमें एक शख्स ने खुद को टेलीकॉम अधिकारी बताया. इसके बाद दूसरे आरोपी ने फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर महिला को यकीन दिलाया कि वह एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस चुकी हैं. उन्हें डराया गया कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है. इसी मानसिक दबाव में आकर महिला ने अपनी जिंदगी भर की कमाई अपराधियों के हवाले कर दी.

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कमीशन के लिए बैंक अकाउंट्स का सौदा

गिरफ्तार किए गए आरोपी नरेंद्र सिन्हा और गुंजन दिनेशचंद्र ने मिलकर कई बैंक खाते खोले थे. पुलिस जांच में सामने आया कि इन खातों में जो भी रकम जमा होती थी, उसे ये दोनों निकाल लेते थे और अपना कमीशन काटकर मुख्य साइबर अपराधियों को सौंप देते थे. वेस्टर्न रीजन साइबर सेल ने मनी ट्रेल का पीछा करते हुए इन दोनों को ट्रैक किया. इनके पास से कई बैंक खातों और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े सबूत मिले हैं.

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आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज

जब महिला को ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने शुरुआत में पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिसे बाद में साइबर सेल को सौंप दिया गया. पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके.

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