अजित पवार को अपनी पार्टी की कमान सौंपने वाले थे शरद पवार? सामने आया NCP का मर्जर प्लान

एनसीपी के दोनों गुटों के मर्जर की चर्चा पिछले कुछ समय से जोरों पर है. मर्जर प्लान तैयार था, जिसके मुताबिक शरद पवार सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर सलाहकार की भूमिका में आ जाते और पार्टी की कमान अजित पवार को सौंप देते.

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लगभग तैयार था मर्जर का फॉर्मूला (Photo: PTI) लगभग तैयार था मर्जर का फॉर्मूला (Photo: PTI)

ऋत्विक भालेकर

  • मुंबई,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों- एनसीपी (एसपी) और एनसीपी (एपी) के विलय की चर्चा है. महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में पिछले महीने ही इस तरह की चर्चा ने जोर पकड़ा था और अब इसे लेकर संभावित फॉर्मूला सामने आया है. एनसीपी के एकीकरण का जो संभावित फॉर्मूला सामने आया है, उसके मुताबिक शरद पवार एक्टिव पॉलिटिक्स से संन्यास का ऐलान कर पार्टी में सलाहकार की भूमिका में आ जाते.

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दोनों गुटों के एकीकरण के फॉर्मूले में पार्टी का नेतृत्व अजित पवार को सौंपने की बात थी. एनसीपी (एपी) की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया था कि पार्टी का नेतृत्व और निर्णय लेने के अधिकार, ये राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर अजित पवार को सौंप दिए जाएं. केंद्रीय नेतृत्व अजित गुट को सौंपने की डिमांड के साथ प्रस्ताव राज्यस्तर पर नेतृत्व शरद पवार गुट को सौंपने का दिया गया था. यानी महाराष्ट्र की लीडरशिप शरद पवार की अगुवाई वाले गुट के ही पास रहता.

केंद्रीय और राज्य नेतृत्व को लेकर भी अभी कोई फैसला नहीं हुआ था, यह केवल प्रस्ताव तक ही सीमित था. कैबिनेट में भागीदारी के मुद्दे पर भी दोनों गुटों में बात हुई थी. पॉवर शेयरिंग के जिस फॉर्मूले पर चर्चा हुई थी, उसके मुताबिक शरद पवार गुट ने महाराष्ट्र सरकार में तीन और केंद्रीय कैबिनेट में एक पद की डिमांड की थी. महाराष्ट्र सरकार में शरद गुट ने दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री पद के लिए दावेदारी की थी.

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शरद गुट की ओर से मंत्री पद के लिए जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे और रोहित पवार के नाम प्रमुख दावेदार के तौर पर चर्चा में थे. केंद्रीय बर्थ को लेकर महाराष्ट्र बीजेपी ने गेंद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पाले में डाल दी थी. महाराष्ट्र बीजेपी के नेताओं ने साफ कह दिया था कि केंद्रीय कैबिनेट में बर्थ देने या नहीं देने का फैसला पूरी तरह से प्रधानमंत्री का होगा. इसे लेकर हम किसी तरह का आश्वासन नहीं दे सकते. प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं को साथ लाने की जिम्मेदारी अजित पवार ने ली थी.

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आठ सांसद और 10 विधायकों वाली एनसीपी (एसपी) के साथ एनसीपी (एपी) का रणनीतिक तालमेल हो गया था, लेकिन दिल्ली में मंत्री पद को लेकर प्रस्ताव अटक गया. कथित तौर पर एनसीपी के दोनों गुटों के बीच एकीकरण के संभावित फॉर्मूले पर चर्चा जनवरी 2025 में शुरू हो गई थी. यह बातचीत कथित रूप से महाराष्ट्र विधानसभा के एक सत्र के दौरान शुरू हुई थी, जब अजित पवार ने जयंत पाटिल से संपर्क किया था.

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मुंबई में इसके बाद जयंत पाटिल के आवास पर देर रात कई गुप्त बैठकें हुईं. इन गुप्त बैठकों में एकीकृत एनसीपी के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया था. यह फॉर्मूला दोनों गुटों के बीच पुल का काम कर सकता था, लेकिन लागू नहीं हो सका. फिलहाल, एनसीपी दो हिस्सों में बंटी हुई है और यह प्रस्ताव राज्य की राजनीति में 'क्या होता अगर...' चैप्टर बनकर रह गया.

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