नासिक के TCS बीपीओ में हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण और यौन शोषण के मामले में एक नया मोड़ आ गया है. इस केस की मुख्य आरोपी निदा खान ने अब कोर्ट में अपनी 'प्रेगनेंसी' का हवाला देकर अग्रिम जमानत की मांग की है. इस तर्क पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करके कड़े सवाल उठाए हैं. कानूनगो ने साफ शब्दों में कहा है कि इतने गंभीर अपराध के मामले में सिर्फ गर्भवती होना जमानत का आधार नहीं होना चाहिए. उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि आरोपी को जेल भेजा जाए, क्योंकि वहां भी अस्पताल और बच्चों की देखभाल के लिए जरूरी सुविधाएं मौजूद होती हैं.
दरअसल, निदा खान के वकील ने कोर्ट में दावा किया है कि वह फरार नहीं है, बल्कि मुंबई में अपने परिवार के साथ रह रही है. वकील के अनुसार, वह गर्भवती है और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है. जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, प्रियंक कानूनगो ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गर्भावस्था को ही जमानत का आधार मान लिया गया, तो जेलों में बने अस्पतालों और डॉक्टरों की जरूरत ही क्या रह जाएगी? उन्होंने तर्क दिया कि जेल में रहने वाली मांओं के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी जैसी सुविधाएं होती हैं, इसलिए कानून के मामले में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए.
प्रियंक कानूनगो ने अपने ट्वीट में लिखा कि आरोपी और उसके होने वाले बच्चे के अधिकारों की रक्षा करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है. इसलिए उसे जेल भेजने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आनी चाहिए. दूसरी तरफ, महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल टीम (SIT) निदा खान को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही है. पुलिस को जांच में पता चला है कि नासिक के इस ऑफिस में कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और अपना रहन-सहन बदलने का दबाव बनाया जाता था. बाकायदा एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर हिंदू कर्मचारियों को फंसाने की साजिश रची जा रही थी.
बता दें कि इस पूरे मामले में अब तक 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और पुलिस ने 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. आरोपों के मुताबिक, निदा खान उस समूह का हिस्सा थी जो महिला कर्मचारियों को ब्लैकमेल करने और उनका उत्पीड़न करने में शामिल था. कंपनी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि निदा खान कोई एचआर हेड नहीं, बल्कि एक टेलीकॉलर के रूप में कार्यरत थी. चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी के भीतर यौन उत्पीड़न की शिकायतों का आंकड़ा भी काफी बढ़ा है.
फिलहाल, नासिक की उस यूनिट में कामकाज के तरीके में बदलाव किया गया है और कुछ ही कर्मचारी ऑफिस से काम कर रहे हैं. पुलिस की टीमें अब निदा खान की लोकेशन को लेकर सक्रिय हैं. अब सारी नजरें नासिक कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह आरोपी की 'प्रेगनेंसी' वाली दलील को स्वीकार करेगा या कानूनगो के तर्कों के आधार पर उसे जेल भेजा जाएगा.
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