खाड़ी देशों में तनाव और युद्ध की आशंका के बीच देश में डीजल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. इसका असर महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में साफ देखने को मिल रहा है. यहां खरीफ सीजन से पहले किसान डीजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
बुलढाणा और वाशिम जिलों के ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पंपों पर डीजल के लिए लंबी कतारें लग रही हैं. कई जगहों पर ट्रैक्टर और कैनों की लाइनें घंटों तक खड़ी रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद किसानों को पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा. आजतक के संवाददाता धनंजय साबने ने अकोला के पेट्रोल पंप पर इन दो किसानों से बातचीत की.
कुछ स्थानों पर विवाद और झड़पों के वीडियो भी सामने आए हैं. अकोला जिले में स्थिति थोड़ी अलग जरूर है. यहां बड़े डिपो होने के कारण डीजल मौजूद है, लेकिन आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसान यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय पंपों पर दबाव बढ़ गया है.
80 किमी दूर से डीजल लेने पहुंचा किसान
वाशिम जिले के धेपुड गांव के किसान धनंजय गंगावने इस संकट की जमीनी हकीकत बयां करते हैं. तेज धूप में केसरिया दुपट्टा, नीला शर्ट, माथे पर तिलक और सिर पर सफेद दुपट्टा बांधकर उन्होंने 80 किलोमीटर का सफर तय किया और अकोला जिले के बार्शी टाकळी स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचे. 5 एकड़ खेती करने वाले धनंजय के लिए खरीफ की तैयारी में ट्रैक्टर से जुताई बेहद जरूरी है, लेकिन उनके क्षेत्र में डीजल मौजूद नहीं था.
धनंजय ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, हम 8-10 पेट्रोल पंप घूमे, लेकिन कहीं कैन में डीजल नहीं मिला. आखिरकार यहां 1000 रुपए का डीजल मिला, लेकिन इसके लिए 200 रुपए का पेट्रोल खर्च करना पड़ा. धनंजय बताते हैं कि ये डीजल उनकी जरूरत के हिसाब से बेहद कम है, लेकिन मानसून से पहले खेत तैयार करने के लिए ये भी राहत जैसा है. इसी तरह वाशिम के मालेगांव के एक किसान (15 एकड़ खेती) भी कई पंपों पर भटकने के बाद अकोला में डीजल लेने पहुंचे.
दोहरी मार: भीषण गर्मी और डीजल संकट
विदर्भ में तापमान 45-46 डिग्री तक पहुंच चुका है. एक ओर पानी के लिए किसान और मजदूर भटक रहे हैं, वहीं अब डीजल के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. खरीफ सीजन से पहले ये स्थिति किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि समय पर जुताई और बुवाई नहीं होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
पेट्रोल पंप संचालकों का दावा- डिमांड बढ़ी, सप्लाई अटकी
पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में डीजल और पेट्रोल की बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.
उनका कहना है कि भंडारण में डीजल-पेट्रोल मौजूद है, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन में देरी के कारण समय पर सप्लाई पंपों तक नहीं पहुंच पा रही. इसी वजह से कई पंपों पर कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म हो रहा है और 'ड्राई' की स्थिति बन रही है.
अकोला पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल राठी के मुताबिक, ये वास्तविक कमी से ज्यादा 'पैनिक' का मामला है. उन्होंने कहा, पिछले डेढ़ महीने तक सब सामान्य था, लेकिन सरकारी एडवाइजरी, ईंधन की बढ़ती कीमतों और संभावित संकट की खबरों के बाद लोगों में डर बढ़ गया है कि आगे डीजल मिलेगा या नहीं.'
उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन नजदीक होने के कारण किसान जल्द से जल्द खेत तैयार करना चाहते हैं, इसलिए वो जरूरत से ज्यादा डीजल लेने की कोशिश कर रहे हैं. वो कहते हैं, 'पिछले महीने की 15 तारीख तक जितनी बिक्री हुई थी, उससे इस महीने 30% ज्यादा डीजल और पेट्रोल की खपत हुई है. जिन पंपों पर पहले कम बिक्री होती थी, वहां भी अब कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म हो रहा है.'
राठी ने ये भी कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री ईंधन बचाने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोग 50-80 किलोमीटर दूर जाकर डीजल लाने में कई लीटर पेट्रोल खर्च कर रहे हैं.
पंप संचालक बोले- घबराएं नहीं, फ्यूल उपलब्ध है
अकोला के श्री संत पेट्रोल पंप संचालक मोहम्मद रेहान मोहम्मद रफीक का कहना है, 'हमारे पास डीजल-पेट्रोल उपलब्ध है. हम किसी को खाली नहीं भेज रहे, लेकिन बाहर जिलों से भीड़ बढ़ने से दबाव जरूर है. ये कमी नहीं, बल्कि पैनिक है.' उन्होंने किसानों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन लें.
किसानों की मांग है कि हर पेट्रोल पंप पर कृषि के लिए डीजल मुहैया कराया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई बढ़ाई जाए. इसके साथ ही किसान कैन में डीजल देने की व्यवस्था आसान करने की भी मांग कर रहे हैं.
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विदर्भ में डीजल संकट की स्थिति दो कारणों से बनी है- एक ओर सप्लाई चेन में देरी और दूसरी ओर पैनिक के कारण अचानक बढ़ी मांग. हालांकि अकोला में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन आसपास के जिलों से बढ़ती भीड़ के कारण यहां भी दबाव बढ़ रहा है. खरीफ सीजन से ठीक पहले अगर इस स्थिति को काबू में नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर खेती और उत्पादन पर पड़ सकता है.
धनंजय साबले