दिल्ली में बैठक, महाराष्ट्र पर तोल-मोल, कल लॉटरी सिस्टम पर फैसला... अगले 24 घंटे मेयर रेस के लिए अहम

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के बाद अभी तक ये तय नहीं हो सका है कि किस शहर में किस पार्टी का मेयर होगा. मुंबई के बीएमसी से लेकर ठाणे तक मामले बीजेपी और शिंदे गुट के बीच फंसा हुआ है. यही वजह है कि मुंबई की लड़ाई का फैसला दिल्ली में होगा.

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महाराष्ट्र मेयर चुनाव के लिए बीजेपी और शिंदे गुट में शह-मात का खेल (Photo-ANI) महाराष्ट्र मेयर चुनाव के लिए बीजेपी और शिंदे गुट में शह-मात का खेल (Photo-ANI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

महाराष्ट्र नगर महापालिका चुनाव के बाद मेयर पद की लड़ाई मुंबई से दिल्ली तक पहुंच गई है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ने भले ही 29 नगर निगम में से 23 में जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन मेयर पद को लेकर दोनों के बीच सियासी खींचतान जारी है. मुंबई और ठाणे को लेकर सियासी पेंच फंसा हुआ है. 

मुंबई मेयर की गुत्थी सुलझाने का नाम नहीं ले रही है. बीजेपी नेतृत्व अब इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया है और बुधवार को दिल्ली में बैठक कर कोई ठोस निर्णय निकालेगा. 

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वहीं, बीएमसी सहित तमाम मेयर पदों के आरक्षण का फैसला गुरुवार को राज्य का शहरी विकास मंत्रालय के लाटरी सिस्टम से तय होगा. ऐसे में अगले 24 घंटे मेयर रेस के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं. 

मुंबई का मामला दिल्ली में सुलझेगा?
देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका पर जीत हासिल करने के बाद से बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान जारी है. ऐसे में अब लड़ाई मुंबई की सड़कों से दिल्ली के सियासी गलियारे तक पहुंच गई है. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके चलते एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपनी 'होटल पॉलिटिक्स' खत्म करनी पड़ी. अब इस मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें मेयर के पद का रास्ता निकलेगा. 

बीएमसी चुनाव में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है. उसने 137 सीटों पर चुनाव लड़ा था. वहीं, उसकी सहयोगी शिव सेना शिंदे गुट ने 91 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसे केवल 29 सीटों पर जीत मिली हैं. इस तह भाजपा-शिवसेना के गठबंधन महायुति को स्पष्ट बहुमत मिल गया है और महानगर में गठबंधन के मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया है. 

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बीजेपी नेताओं का तर्क है कि अगर बीजेपी ने ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा होता तो वे आसानी से 100 का आंकड़ा पार कर लेती. शिंदे खेमे का तर्क है कि उन्हें मुस्लिम-बहुल मुश्किल सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया गया. बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं के समर्थन की कमी के कारण वे 11 सीटें बहुत कम अंतर से हार गए. इस गतिरोध को सुलझाने के लिए दिल्ली में एक अहम बैठक होनी है. इसके साथ ही मेयर पद को लेकर जारी सियासी संग्राम को भी खत्म करने की कवायद होगी. 

शिंदे खेमा बीजेपी के साथ निकालेगा समाधान
एकनाथ शिंदे के वफादार पूर्व सांसद राहुल शेवाले, सांसद श्रीकांत शिंदे और सांसद श्रीरंग बर्ने बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार के साथ मेयर पद और स्टैंडिंग, इम्प्रूवमेंट, हेल्थ और एजुकेशन जैसी पावरफुल कमेटियों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत करेंगे.

विपक्ष ने तीखा हमला बोला है कि शिवसेना (यूबीटी)नेता संजय राउत ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास में यह पहली बार है कि मुंबई के मेयर का फैसला दिल्ली में अमित शाह कर रहे हैं, इसे उन्होंने मराठी गौरव पर हमला बताया. हालांकि, मामला सिर्फ मुंबई के मेयर तक का नहीं है बल्कि ठाणे से लेकर 

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अंबरनाथ से लेकर अकोला तक नगर परिषदों में बीजेपी और शिवसेना के साथ मेयर पद पर कब्जे की जो सियासत हुई है उसे लेकर एकनाथ शिंदे भी सजग हैं क्योंकि अंबरनाथ में 14 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने 27 सीटें जीतने वाली शिवसेना को किनारा करके कांग्रेस का हाथ थाम लिया. संभाजी नगर में बीजेपी 57 और शिवसेना के 14 पार्षद जीते हैं.

नवी मुंबई में बीजेपी 65 सीटें जीती है और शिवसेना के पास 42 सीटें हैं वहां भी बीजेपी का दावा है पिंपरी चिंचवड़ में बीजेपी 85 सीटें जीती है जबकि शिवसेना को सिर्फ 6 सीटें मिली हैं. कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी 50 तो शिवसेना 53 सीटें जीती है. उद्धव की पार्टी के 3 पार्षदों को साथ शिवसेना ने दावा मजबूत किया है

उल्हासनगर में भी है जहां बीजेपी ने 38 तो शिवसेना ने 36 सीटें जीती हैं. यहां 4 अन्य पार्षदों के समर्थन के साथ शिवसेना दावा कर रही है ठाणे में 71 सीटें जीतने वाली शिवसेना का दावा मेयर की कुर्सी पर बनता है क्योंकि यहां बीजेपी को 28 सीटें ही मिली हैं. इस तरह मुंबई से लेकर ठाणे और नासिक तक मामला मेयर पद पर उलझा हुआ है.

शिंदे की लाटरी फॉर्मूले से तय होगा मेयर 

मुंबई के बीएमसी से लेकर पुणे सहित सभी 29 नगर निगम में मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग के द्वारा तय होता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण का फैसला शिंदे के विभाग के द्वारा तय किया जाना है.

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मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग मेयर पद के श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है. मेयर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया को चुनाव के पहले तय नहीं किया. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. ऐसे में मुंबई के मेयर का पद भी तय नहीं है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है.

एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाला शहरी विकास विभाग मेयर पद के आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया 22 जनवरी को तय करेगी. ऐसे में पहले शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर का आरक्षण तय होगा. इसके सके बाद मेयर ही कौन बनेगा, उसे लेकर फैसला होगा. कांग्रेस नेता नाना पटोले ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि 22 जनवरी को होने वाली मेयर लॉटरी से और राजनीतिक हेरफेर का खुलासा होगा. 

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