महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में गैस की कमी का असर होटल कारोबार और छोटे उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है. गैस संकट की वजह से कई जगहों पर कामकाज प्रभावित हुआ है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
लेकिन इसी संकट के बीच एक संस्था ऐसी भी है जो रोज़ाना हजारों लोगों के लिए खाना तैयार कर रही है और वो भी बहुत कम गैस का इस्तेमाल करके. शहर में Anna Amrut Foundation की तरफ से संचालित रसोई में भाप की मदद से खाना पकाया जा रहा है, जिससे गैस की खपत काफी कम हो गई है.
ये संस्था ISKCON के केंद्र के जरिए पोषण आहार योजना के तहत स्कूली विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराती है. यहां रोजाना लगभग 35 से 40 हजार विद्यार्थियों के लिए खाना तैयार किया जाता है. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों को भी मुफ्त खाना उपलब्ध कराया जाता है.
2012 में शुरु हुआ था एक्सपेरिमेंट
रसोई में सौर ऊर्जा से पैदा होने वाली बिजली और गर्म पानी की मदद से भाप के जरिए खाना पकाया जाता है. एक बड़े किचन हॉल में 600 लीटर क्षमता वाले सात बड़े कुकर लगाए गए हैं, जिनमें एक बार में करीब 400 किलो खाना भाप से तैयार किया जा सकता है. ये एक्सपेरिमेंट साल 2012 में छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, जो अब बड़े पैमाने पर सफल मॉडल बन चुका है.
भाप से बन रहा करीब 90 प्रतिशत खाना
संस्था के प्रबंधक सुदर्शन पोतभरे के मुताबिक, पहले पूरी तरह गैस पर खाना बनाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे सौर ऊर्जा और भाप से खाना पकाने की प्रणाली विकसित की गई. आज करीब 90 प्रतिशत खाना भाप से तैयार होता है, जबकि गैस का इस्तेमाल सिर्फ 10 प्रतिशत रह गया है.
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रसोई में सप्ताह के अलग-अलग दिनों में खिचड़ी, सांभर, उसल, आमटी, पुलाव, मटर पनीर, सब्जियां, वरण और चावल जैसे पकवान बनाए जाते हैं. चपाती सेंकने और कुछ व्यंजनों की फड़नी के लिए ही गैस का इस्तेमाल किया जाता है.
रोजाना सिर्फ एक से दो सिलेंडर का ही इस्तेमाल
नगर निगम के सहयोग से चल रहे इस फूड शेल्टर के लिए सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को भी पत्र भेजा गया है. फिलहाल यहां रोजाना सिर्फ एक से दो सिलेंडर का ही इस्तेमाल हो रहा है, इसलिए गैस संकट के बावजूद भोजन सेवा लगातार जारी है.
इसरारउद्दीन चिश्ती