महाराष्ट्र की सियासत में क्या डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे एक बार फिर से बड़ा खेला करने जा रहे हैं? शिंदे के दिल्ली दौरे से महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा तेज हो गई है, जिसे लेकर उद्धव ठाकरे गुट में बेचैनी बढ़ गई है. कहा जा रहा है कि उद्धव के आधे से ज्यादा सांसद शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) के आधे से ज्यादा सांसद डिप्टीसीएम एकनाथ शिंद के संपर्क में है और सियासी पाला बदलने के लिए तैयार हैं. शिदे का यह कदम उस बड़े मिशन का हिस्सा है, जिसका मकसद अपनी पार्टी की ताकत बढ़ाना और संसद में अपने सदस्यों की संख्या को बढ़ाना है.
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से बड़ा बदलाव की संभावना जताई जा रही है. एकनाथ शिंदे के तीन दिवसीय दिल्ली दौरे ने उद्धव ठाकरे गुट की बेचैनी को बढ़ा दिया है. हालांकि, शिंदे के साथ दिल्ली दौरे पर मौजूद रहे उदय सामंत ने कहा कि यह दौरा पूरी तरह से सांसदों के साथ संवाद और मार्ग दर्शन के लिए था.
उद्धव को फिर झटका देंगे एकनाथ शिंदे
शिवेसना प्रमुख व डिप्टी सीएम एकनाथ ने अपने दिल्ली दौरे पर सबसे पहले संसद भवन पहुंचे. संसद भवन में पीएम मोदी से मुलाकात की और उसके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मिले थे. सूत्रों की माने तो उद्धव ठाकरे के 9 लोकसभा सांसदों में से आधे से ज्यादा सांसद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के संपर्क में है और पाला बदलने के इच्छुक है.
शिवसेना के सूत्रों ने बताया है कि दिल्ली यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और इस दौरान उन्होंने उद्धव गुट के सांसदों के पाला बदलने के मुद्दे पर चर्चा की. एकनाथ शिंदे ने कथित तौर पर इच्छुक सांसदों की सूची की समीक्षा की और कानूनी विशेषज्ञों के साथ उनके शामिल होने से जुड़े कानूनी प्रावधानों और संभावित बाधाओं पर चर्चा की.
शिंदे खेमा अब इस कदम को आधिकारिक तौर पर अंजाम देने के लिए सही मौके का इंतज़ार कर रहा है, जिससे ठाकरे के नेतृत्व वाला विपक्ष काफी कमज़ोर पड़ सकता है. ऐसे शिंदे ने दिल्ली दौरे पर कानूनी विशेषज्ञों से इस संबंध में राय भी ली है. इसके बाद से ऑपरेशन टाइगर की चर्चा महराष्ट्र में तेज हो गई.
महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा क्यों?
महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव से बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन अपनी जीत का सिलसिला बरकार रखा है. नगर निगम चुनाव से लेकर जिला परिषद और मेयर तक के चुनाव में बीजेपी और शिवेसना की जोड़ी हिट रही है. दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे ने मुंबई की सत्ता भी गंवा चुकी है और बीजेपी का बीएमसी पर पूरी तरह से कब्जा है, जिसके चलते शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं में राजनीतिक बेचैनी बढ़ गई.
एकनाथ शिंदे ने मौके की नजाकत को देखते हुए अपनी सियासी ताकत बढ़ाने की रणनीति बनाई, जिसके लिए उद्धव गुट के सांसदों को मिलाकर अपनी ताकत संसद में बढ़ाने की है. ऐसे में एकनाथ शिंदे का दिल्लीदौरा ऐसे समय में हुआ है, जब महाराष्ट्र में दल-बदल की अटकले लगा जा रही थी. शिंदे के दिल्ली में पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात को 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं को और हवा दी है.
शिंदे गुट का इनकार, उद्धव गुट बेकरार
उद्धव गुट के सांसदों के पाला बदलने की संभावनाओं से शिंदे गुट के नेता इनकार कर रहे हैं. शिवसेना कोटे के मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया है कि शिंदे के दिल्ली दौरे का 'ऑपरेशन टाइगर' से कोई संबंध नहीं है. दिल्ली में शिंदे के साथ मौजूद रहे सामंत ने कहा कि यह दौरा पूरी तरह से सांसदों के साथ संवाद और मार्गदर्शन के उद्देश्य से किया गया था.
शिंदे गुट के नेता भले ही इनकार कर रहे हों, लेकिन उद्धव गुट बेकरार है. उद्धव ठाकरे के सामने अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. केंद्र से लेकर राज्य तक की सत्ता से बाहर हो गई है. इतना ही नहीं जिला परिषद से लेकर नगर निगम और नगर पालिका तक में पार्टी कमजोर हुई है. शिवेसना के नेताओं की सियासी बेचैनी बढ़ती जा रही है और उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है.
ऋत्विक भालेकर / कुबूल अहमद