महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की एक विमान हादसे में मौत हो गई. अजित पवार बुधवार को सुबह मुंबई से बारामती के लिए एक विशेष विमान से रवाना हुए थे. लैंडिंग के समय विमान में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ. पवार परिवार के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है.
महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार 8 बार विधायक और छह बार डिप्टी सीएम रहे. यही नहीं, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वो वित्त मंत्री रहे हैं. महाराष्ट्र की राजनीति के सियासी धुरी माने जाते थे तो सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें अपने सियासी बैलेंस को बनाए रखने के लिए साथ मिला रखा था.
अब अजित पवार के अचानक निधन हो जाने के चलते महाराष्ट्र के साथ-साथ एनसीपी की राजनीति बदल गई है.
पहले समझते हैं कि अजित की संसदीय ताकत
अजित पवार की दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक सियासी हनक थी. संसद में फिलहाल अजित पवार की पार्टी के चार सांसद हैं, जिसमें लोकसभा में एक सदस्य है और राज्यसभा में अजित पवार की पार्टी के तीन राज्यसभा सदस्य हैं. लोकसभा में सुनील तटकरे दत्तात्रेय सांसद हैं तो प्रफुल पटेल, सुनेत्रा पवार और नितिन लक्ष्मणराव जादव राज्यसभा में सांसद हैं.
अजित पवार की पार्टी का केंद्र की मोदी सरकार को समर्थन है. दोनों ही सदनों में बीजेपी के लिए एनसीपी सियासी अहमियत रखती है. लेकिन, इससे भी बड़ी ताकत महाराष्ट्र की विधानसभा में उनकी पार्टी की है.
विधानसभा में अजित पवार की पार्टी की ताकत
महाराष्ट्र की विधानसभा में अजित पवार की अपनी सियासी अहमियत रही है. अजित पवार की एनसीपी के 41 विधायक 2024 के विधानसभा चुनाव में चुनकर आए थे. अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के 40 विधायक रह गए हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सदस्य हैं, जिसमें से बीजेपी के 132, शिंदे की शिवसेना के 57 और अजित पवार की पार्टी के 41 विधायक थे. महायुति के लिए सियासी ताकत अजित पवार माने जाते थे.
हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव में बारामती में सुप्रिया सुले की खिलाफ अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को उतार दिया. इस तरह बारामती में सुप्रिया बनाम सुनेत्रा की बीच सियासी जंग हुई. इसमें सुप्रिया सुले भारी पड़ी और अजित पवार की पत्नि को हार का मूंह देखना पड़ा. यह हार अजित पवार के लिए झटका थी, लेकिन उसके बाद वो दोबारा से उभरे, विधानसभा और निकाय चुनाव में भारी पड़ेय
महाराष्ट्र के परिषद और निकाय में अजित पवार
विधानसभा और लोकसभा में ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र के विधान परिषद और निकायों में भी अजित पवार का सियासी दबदबा था. विधान परिषद में अजित पवार की एनसीपी के 9 एमएलसी हैं. इस तरह से विधानसभा में 41 और विधान परिषद में 9 सदस्य है. महाराष्ट्र के दोनों सदनो में एनसीपी की सियासी ताकत है.
वहीं, अजित पवार की पार्टी के तमाम शहरी निकायों में कब्जा है. नगर निगम चुनाव में अजित पवार की पार्टी के 167 नगर सेवक अलग-अलग शहरों में जीते हैं. इसके अलावा अजित पवार की पार्टी ने 37 नगर परिषद और नगर पंचायत के अध्यक्ष पर काबिज है.
पुणे जिले के 17 में से 10 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के एनसीपी के अध्यक्ष हैं. ऐसे ही बीएमसी में 3, ठाणे में 9, जलगांव में 1, कोल्हापुर में 4, परभानी में 9, पुणे में 27, नागपुर में 1 और पिंपरी चिंचवाड़ में 37 नगर सेवक एनसीपी के हैं. अब जब अजित पवार दुनिया में नहीं रहे तो महाराष्ट्र की राजनीति में 360 डिग्री बदल जाएगी.
राजनीति की धुरी का सियासी 'पावर'
अजित पवार अपने सांसदों और विधायकों के दम पर सियासी पावर बनाकर रखे हुए थे. केंद्र में मोदी सरकार को समर्थन दे रखा था तो महाराष्ट्र में फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल थे. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना से 2022 में हाथ मिलाया तो बीजेपी को मुख्यमंत्री पद से समझौता करना पड़ा था. एकनाथ शिंदे के साथ सियासी बैलेंस बनाए रखने के लिए ही देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार को अपने साथ मिलाया था.
अजित पवार की पार्टी के पास 40 विधायक थे. इस तरह से शिंदे की प्रेशर पॉलिटिक्स को सिर्फ कंट्रोल ही नहीं किया था बल्कि 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी भी अपने कब्जे में ले ली. बीजेपी ये सबकुछ अजित पवार के जरिए ही कर सकी थी, क्योंकि एनसीपी के पास 41 विधायक थे. अजित पवार महाराष्ट्र् के डिप्टीसीएम के साथ-साथ वित्त मंत्री भी थे. इसके अलावा हसन मुश्रीफ , छगन भुजबल, दत्तात्रय भरणे, अदिति तटकरे, नरहरि झिरवाल, मकरंद पाटिल, बाला साहेब पाटिल और इंद्रनील नाइक मंत्री हैं.
महाराष्ट्र में ही नहीं अजित पवार केंद्र की राजनीति में भी सियासत हनक है, भले ही उनके कोटे से कोई भी मंत्री मोदी सरकार में न हो, लेकिन राज्यसभा से लेकर लोकसभा तक में ताकत रखते हैं. इसके बदौलत मोदी सरकार में उनकी अपनी अहमियत है. राज्यसभा में सरकार के कई अहम विधेयक को पास कराने में रोल अदा करते हैं?
कुबूल अहमद