'कुर्सी सिर पर चढ़ जाए तो न इंसाफ बचेगा, न सेवा... बस पाप होगा', बोले CJI बीआर गवई

अमरावती में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि सिर्फ अफसरशाही नहीं, बल्कि न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं को भी अपने आचरण पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा, 'न्यायाधीशों को वकीलों को सम्मान देना चाहिए. अदालत वकील और न्यायाधीश दोनों की होती है."

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि कुर्सी सम्मान की है, घमंड से अपमानित न करें   (PTI Photo) सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि कुर्सी सम्मान की है, घमंड से अपमानित न करें (PTI Photo)

धनंजय साबले

  • अमरावती,
  • 26 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के दर्यापुर (अमरावती) में न्यायालय की नव-निर्मित भव्य इमारत के उद्घाटन समारोह में शिरकत की. उन्होंने न्यायपालिका, प्रशासन और अधिवक्ता समुदाय को एक बेहद सख्त लेकिन मूल्यवान संदेश दिया.  

चीफ जस्टिस गवई ने अपने संबोधन में कहा, "यह कुर्सी जनता की सेवा के लिए है, न कि घमंड के लिए. कुर्सी अगर सिर में चढ़ जाए, तो यह सेवा नहीं, बल्कि पाप बन जाती है." उनका यह बयान न्यायपालिका और प्रशासनिक पदों पर बैठे हर व्यक्ति के लिए एक चेतावनी की तरह था.

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भूषण गवई ने सिर्फ प्रशासनिक अफसरों को ही नहीं, बल्कि न्यायाधीशों और वकीलों को भी उनके व्यवहार के लिए खरी-खरी सुनाई. उन्होंने कहा, "न्यायाधीशों को वकीलों को सम्मान देना चाहिए. यह अदालत वकील और न्यायाधीश दोनों की है."

जूनियर वकीलों को चेतावनी भरे अंदाज में उन्होंने कहा, "25 साल का वकील कुर्सी पर बैठा होता है और जब 70 साल का सीनियर आता है, तो उठता भी नहीं. थोड़ी तो शर्म करो! सीनियर का सम्मान करो." 

यह भी पढ़ें: 'कोई सरकारी पद नहीं लूंगा और...', CJI बीआर गवई ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान

दर्यापुर को मिली नई न्यायिक इमारत की सौगात

दर्यापुर और अंजनगांव क्षेत्र के लिए यह न्यायिक इमारत एक बड़ी सौगात है. 28.54 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस नई इमारत में अब दिवाणी (सिविल) और फौजदारी (क्रिमिनल) दोनों तरह के मामलों की सुनवाई की जाएगी. उद्घाटन कार्यक्रम में जजों के साथ-साथ जिले के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता संघ के सदस्य और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे.

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CJI गवई का सीधा संदेश: 'पद मिले तो झुकना सीखो, अकड़ना नहीं'
अपने पूरे भाषण के दौरान भूषण गवई का जोर इसी बात पर रहा कि चाहे कोई भी कुर्सी हो- वह जिलाधिकारी की हो, पुलिस अधीक्षक की या न्यायाधीश की हो, सिर्फ और सिर्फ जनसेवा का माध्यम है. उन्होंने दो टूक कहा, "कुर्सी सिर में घुस गई, तो न्याय का मोल खत्म हो जाएगा. ये कुर्सी सम्मान की है, इसे घमंड से अपमानित न करें."

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