सियासत को 'लाइट' और 'लाफ्टर' बनाते रहने वाले अजित दादा पवार!

राजनीति शतरंज की बिसात है. अजित दादा पवार राजनीति की इस 'सूखी' और 'कठोर' बिसात को 'ह्यूमर' को नमी से सींचते थे. उनका ये सहज अंदाज लोगों को गुदगुदा जाता था और वे जनता के मन में सहज ही जगह बना लेते थे. मराठा राजनीति के क्षत्रप अजित पवार का बयान लोगों को पॉलिटिक्स के घिसे पिसे ट्रेंड से ब्रेक देकर उनमें खिलखिलाहट भर जाता था.

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बुधवार को एक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया. (Photo: ITG) बुधवार को एक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया. (Photo: ITG)

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

अजित पवार नहीं रहे. दादा का स्टाइल व्यावहारिक, तेज और कभी-कभी तीखा था, लेकिन उनके बयान राजनीति के कठिन पलों को भी 'लाइट' और 'लाफ्टर' से भर देते थे. वे फटाफट काम करने के लिए मशहूर थे, उनका ह्यूमर राजनीतिक टेंशन को पल में हल्का कर देता था.

महाराष्ट्र की राजनीति तीखी बयानबाज़ी, भारी-भरकम शब्दों और सत्ता संघर्ष के लिए जानी जाती है. लेकिन इसी सियासत में अजित पवार ऐसे नेता रहे जिन्होंने कई बार सबसे टफ और तनावपूर्ण पलों को भी हल्के-फुल्के अंदाज़ और हंसी-मज़ाक से भर दिया. सत्ता के गलियारों में ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार जितने तेज़-तर्रार प्रशासक माने जाते थे, उतने ही अपने चुटीले और कभी-कभी चौंकाने वाले बयानों के लिए भी. 

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अजित दादा, लव यू...

एक बार एक रैली के दौरान अजित पवार के एक प्रशंसक ने चिल्लाकर उन्हें दूर से लव यू कहा दादा. असहज होने के बजाय अजित पवार ने तुरंत अपने अंदाज में जवाब दिया और कहा, "पहले घड़ी का बटन दबाओ (वोट दो), घर जाकर बीवी से कहते रहो लव यू, लव यू."

लोकसभा में वादा कहां गया था

दरअसल पवार महाराष्ट्र की राजनीति की वह 'घड़ी' थे, जिसकी सुइयां कभी रुकती नहीं थीं, चाहे दादा का वक्त कैसा भी रहा हो.

बारामती से अजित पवार की कई यादें जुड़ी हैं. 2024 में बारामती में अजित पवार कार्यकर्ताओं से मीटिंग कर रहे थे. एक कार्यकर्ता ने घोषणा की-  'एकच वादा अजितदादा' यानी की- एक ही वादा है, अजित दादा है. 

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अजित पवार पीछे कहां रहने वाले थे. उन्होंने तुरंत मजाक में कहा, "वादा लोकसभा में कहां गया था?" उनका यह बयान सुनकर कार्यकर्ता हंसे बिना नहीं रह सके. अजित दादा का ये बयान लोकसभा चुनाव में एनसीपी की हार पर उनका खुद का मजाक उड़ा जाने की उनकी क्षमता थी. यह दिखाता है कि वे हार-जीत के टफ मोमेंट्स को भी हंसकर पार करते थे. 

आपके पास वोट है, मेरे पास फंड है

अजित पवार खरी-खरी कहने में यकीन रखते थे. वैसे ऐसे नेता थे जो कठिन मुद्दे पर भी ह्यूमर का तड़का लगाकर बहस को हल्का कर देते थे. कुछ ही दिन पहले मालेगांव में उनके प्रचार का अनोखा तरीका देखने को मिला था. 

इस दौरान अजित पवार ने कहा था, “आपके पास वोट है… मेरे पास फंड है… अगर आप कट मारेंगे तो मैं भी कट मारूंगा. अब आपको तय करना है कि क्या करना है.”

यह दिखाता है कि दादा राजनीति के टफ मोमेंट्स को 'लाइट' रखने में माहिर थे. 

यह बयान चुनावी दबाव को ह्यूमर से बैलेंस करता था. यह दिखाता है कि राजनीति में हाजिरजवाबी जरूरी है, लेकिन मजाकिया तरीके से. अजित दादा पवार इस फन के उस्ताद थे. 

CM बनने का वह मौका कभी आएगा

66 साल के अजित पवार अपने नेतृत्व को लेकर काफी ख्वाहिशमंद और आत्म विश्वास से भरे रहते थे. वे अपनी राजनीतिक महात्वाकांक्षा नहीं छिपाते थे. पिछले साल जब महाराष्ट्र में महिला सीएम कैंडिडेट को लेकर बात चल रही थी तो उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की थी. महाराष्ट्र दिवस के मौके पर NCP ने गौरवशाली महाराष्ट्र के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया था. 

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इसी दौरान एक पत्रकार ने कहा कि महाराष्ट्र को एक महिला मुख्यमंत्री मिलनी चाहिए. बात तो सामान्य थी. लेकिन अजित पवार ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा- अब मुझे भी कई बार लगता है कि मुझे मुख्यमंत्री बनना चाहिए था, लेकिन अब तक ऐसा योग नहीं आया. कभी ना कभी वह मौका आ जाएगा.  अजित पवार के इस बयान पर वहां खूब ठहाका लगा. 

दरअसल अजित पवार की ‘लाइट एंड लाफ्टर’ राजनीति का एक मजेदार पहलू आत्मव्यंग्य भी था. इससे वह मुश्किल हालात भी आसानी से पार कर जाते थे. 

मैं तो शपथ लेने वाला हूं

2024 का वो प्रेस कॉन्फ्रेंस कौन भूलेगा. महाराष्ट्र में NDA को बंपर को बंपर बहुमत मिला था. लेकिन सीएम, डिप्टी सीएम के नाम पर रस्साकशी चल ही रही थी. इसी माहौल में एक पीसी हुई. मंच पर थे तीन दिग्गज, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार. 

इस दौरान एकनाथ शिंदे से पूछा गया, "क्या आप शपथ लेंगे?" शिंदे ने कहा, "शाम तक बताते हैं." दादा ने तुरंत हाजिरजवाबी पेश की. उन्होंने कहा था, "इनका शाम तक समझ में आएगा, मैं तो शपथ लेने वाला हूं!" इसके बाद शिंदे ने भी चुटकी ली. उन्होंने कहा, "दादा तो शाम को भी शपथ लेते हैं, सुबह भी!" 

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इतना सुनते ही फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार कहकहे लगाकर हंस पड़े. पवार ब्रांड की राजनीति के जरिये यह हल्की-फुल्की नोकझोंक महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स को 'लाइट' रखने का परफेक्ट उदाहरण है. जहां सत्ता के खेल में टेंशन होती है, वहां दादा का चतुराई भरा जवाब सबको हंसाता था. 

अजित पवार का ह्यूमर सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं था, उनका 'फटाफट' स्टाइल जीवन की अनिश्चितता पर भी लागू होता था. वे कहते थे, "समय बर्बाद मत करो, काम करो." आज उनके जाने के बाद यह एहसास और गहरा लगता है. दादा ने सियासत को कभी बोझिल नहीं होने दिया.

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