'पिंक पहनें, थोड़ा मुस्कुराएं...', अजित पवार को दी गई थी सलाह, राजदीप सरदेसाई ने याद किया आखिरी इंटरव्यू

प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले अजित पवार को वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने याद किया है. राजदीप सरदेसाई ने बताया कि अजित पवार एक मजबूत छवि वाले नेता थे जिन्होंने अपने क्षेत्र को आगे ले जाने में बहुत अहम भूमिका निभाई. वो अपने क्षेत्र के लोगों को उनके नाम से जानते थे.

Advertisement
अजित पवार सख्त व्यक्तित्व वाले नरम दिल नेता थे (Photo: Reuters/PTI) अजित पवार सख्त व्यक्तित्व वाले नरम दिल नेता थे (Photo: Reuters/PTI)

राजदीप सरदेसाई

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

अजित 'दादा' पवार को लेकर मेरी यादें मुख्य रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान से जुड़ी हैं. यह पहला मौका था जब अजित पवार चुनाव में अपने मेंटर और चाचा शरद पवार के खिलाफ मैदान में थे. अजित पवार ने इससे पहले कभी नेशनल मीडिया से बात नहीं की थी, खासकर हिंदी में तो बिल्कुल नहीं. वो कभी-कभार मराठी चैनलों से ही बातचीत करते थे.

Advertisement

मुझे याद है, मैं बारामती गया था और उन्हें इंटरव्यू के लिए राजी करने में पूरा एक दिन लग गया. उनके राजनीतिक करियर के उस अहम मोड़ पर आखिरकार उन्होंने मुझे डिनर पर बुलाया. डिनर पर हमने उनकी राजनीति के कई पहलुओं पर बातचीत की. उसी बातचीत में उन्होंने अपना एक नरम पहलू भी शेयर किया कि कैसे युवावस्था में वो मुंबई में क्रिकेट मैच देखने जाते थे. उन्होंने बताया कि उन्हें म्यूजिक और खेल का शौक था. उस मुलाकात से पहले मैं अजित पवार के इस पहलू से परिचित नहीं था.

डिनर के दौरान उन्होंने मुझे अगली सुबह करीब 5 या 5:30 बजे आने को कहा. मैंने हैरानी से पूछा, 'सर, इतनी सुबह?' उन्होंने कहा, 'हां.' डिनर करीब आधी रात को खत्म हुआ था. 

अपने समर्थकों को नाम से जानते थे अजित पवार

Advertisement

अगली सुबह जब मैं 5:30 बजे बारामती स्थित उनके घर पहुंचा, तो वो पहले से जाग चुके थे. घर के बगीचे में करीब 50 से 100 लोग उनसे मिलने के लिए जमा हुए थे. वहीं मुझे एहसास हुआ कि बारामती में जमीनी स्तर पर अजित पवार की पकड़ कितनी मजबूत थी. इसके बाद मैंने देखा कि वो लोगों के बीच आए... वो लगभग हर व्यक्ति को नाम से जानते थे और उनकी समस्याएं सुन रहे थे.

लोकसभा चुनाव उनके लिए इसलिए भी बेहद अहम था क्योंकि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, उनकी भतीजी सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं. उस मुकाबले में अजित पवार को हार मिली और सुप्रिया सुले चुनाव जीत गईं. लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने जोरदार वापसी की.

उनके एक चुनावी सलाहकार नरेश अरोड़ा ने उन्हें एक सलाह दी थी- थोड़ा ज्यादा मुस्कुराया करें. अजित पवार की छवि एक सख्त, गंभीर और कभी-कभी बेहद तीखी भाषा इस्तेमाल करने वाले नेता की रही. इसी ‘सॉफ्टनिंग’ स्ट्रैटेजी के तहत उन्हें पार्टी के रंग और टोपी में गुलाबी रंग अपनाने और ज्यादा मुस्कुराने को कहा गया. यह स्ट्रैटेजी काम कर गई और विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया.

मजबूत क्षेत्रीय नेता थे अजित पवार

Advertisement

मैं उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद करता हूं, जिन्हें सब-रीजनल स्तर पर बेहद ताकतवर कहा जा सकता है, बारामती उनका मजबूत गढ़ था, हालांकि उसके बाहर उनका प्रभाव सीमित था.

एक अफसर ने मुझे एक किस्सा भी सुनाया था कि अजित पवार का स्वभाव काफी गुस्सैल भी था. एक बार वो एक फाइल को लेकर इतने नाराज हो गए कि उसे एक अधिकारी की तरफ फेंक दिया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उन्होंने माफी भी मांगी और कहा कि उनका इरादा ऐसा नहीं था.

अजित पवार के कई रूप थे, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वो एक संस्थान निर्माता थे. बारामती में कृषि विश्वविद्यालय और अन्य कई संस्थानों की स्थापना और विकास में उनकी बड़ी भूमिका रही. चाचा से अलग होने के बाद भी उनका परिवार त्योहारों, खासकर गणेश चतुर्थी जैसे मौकों पर, साथ आता रहा.

लंबी रेस का घोड़ा थे अजित पवार

मेरी उनसे आखिरी बातचीत करीब दो हफ्ते पहले हुई थी, बीएमसी और अन्य म्युनिसिपल इलेक्शनों से ठीक पहले. मैंने उनसे पूछा था कि वो इस चुनाव में कैसा प्रदर्शन उम्मीद कर रहे हैं. प्रदर्शन को लेकर वो खुद ज्यादा आश्वस्त नहीं थे, खासकर इसलिए क्योंकि पुणे और चिंचवड़ जैसे उनके गढ़ों में बीजेपी उन्हें चुनौती दे रही थी. उन्होंने मुझसे कहा कि देखते हैं क्या होता है. 

Advertisement

वो चुनाव हार गए, लेकिन मुझे हमेशा लगा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो पर्सनल बातचीत में नरम-मिजाज थे, लेकिन राजनीतिक रूप से लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखते थे... वो लंबी रेस का घोड़ा थे. शायद ही कोई और नेता होगा जो अजित पवार की तरह आधा दर्जन बार उपमुख्यमंत्री बना हो. यही उनकी राजनीतिक मजबूती और टिकाऊपन था. 

अपने राजनीतिक करियर में उतार-चढ़ाव के बावजूद वो इसलिए डटे रहे क्योंकि उन्होंने बारामती में अपने लिए एक मजबूत आधार खड़ा किया था. मैं हमेशा यह बात कहूंगा कि अगर यह देखना हो कि किसी विधानसभा क्षेत्र को कैसे संवारा जाता है, तो बारामती इसका उदाहरण है, एक छोटा सा कस्बा आज उद्यमों और चमक-धमक से भरा हुआ है. इसके विकास में अजित पवार जैसे नेताओं की बड़ी भूमिका रही.

मैं अजित दादा पवार को प्रेम से याद करूंगा. एक बात और वो कभी सीधे फोन नहीं उठाते थे. आपको उन्हें व्हाट्सएप करना पड़ता था, और फिर वो तुरंत जवाब देते थे या खुद कॉल बैक करते थे. अंत में, मैं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं.

ॐ शांति. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement