इस रूट के सभी रेलवे स्टेशन ही चोरी हो गए!

रेल की संपत्ति आपकी अपनी संपत्ति है. शायद झारखंड के झरिया इलाके के लोहा चोरों ने इसका सही अर्थ कुछ अपने अंदाज में समझा. और शायद यही वजह है झरिया स्टेशन और हाल्ट के सामानों पर सिर्फ हाथ साफ ही नहीं किया बल्कि सालों से खाली पड़े स्टेशनों पर अपना कब्जा भी जमा लिया.

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आग के बढ़ते मामलों के बाद बंद किया इस रेलमार्ग को आग के बढ़ते मामलों के बाद बंद किया इस रेलमार्ग को

लव रघुवंशी

  • धनबाद,
  • 04 मई 2016,
  • अपडेटेड 6:57 AM IST

रेल की संपत्ति आपकी अपनी संपत्ति है. शायद झारखंड के झरिया इलाके के लोहा चोरों ने इसका सही अर्थ कुछ अपने अंदाज में समझा. शायद यही वजह है झरिया स्टेशन और हाल्ट के सामानों पर सिर्फ हाथ साफ ही नहीं किया बल्कि सालों से खाली पड़े स्टेशनों पर अपना कब्जा भी जमा लिया.


इन रेल स्टेशनों के कमरों में मुर्गी पालन और रेलवे ट्रैकों के आसपास खेती की जा रही है. धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल मार्ग कभी देश का एक व्यस्त रेलमार्ग रहा है. इस रेलमार्ग में करीब दर्जनों छोटे-बड़े स्टेशन पड़ते है. आज इनमें से अधिकतर स्टेशन या तो गायब हो चुके है या लोहे के कबाड़ में तब्दील हो चुके है. दरअसल अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित होने की वजह से रेलवे ने 2004 -05 से यहां रेलों का परिचालन बंद कर दिया था.

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करोड़ों की संपत्ति कर दी गायब
देखते ही देखते चोरों ने धनसार, झरिया सहित कई का नामो-निशान तक गायब कर दिया. आज धनबाद से धनसार जाने वाले रेल रूट पर खेती की जा रही है और धनसार स्टेशन पर लोगों ने दुकानें खोल दी हैं. यही नहीं, धनसार स्टेशन से होकर गुजरने वाली रेलवे ट्रैक भी चोरी हो गई. कई स्थानों पर तो ट्रैक के किनारे लगे खंभे, फाटक, सिग्नल लाइट्स समेत कई महंगे उपकरण और कीमती पार्ट्स भी लोगों ने बेच दिए हैं. यानी करोड़ों रुपये की संपत्ति सुनियोजित तरीके से गायब कर दी गई है.

50 करोड़ से अधिक की संपत्ति गायब
वैसे झरिया स्टेशन तो बंद होने के साथ ही उजड़ गया था लेकिन स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज, यात्री शेड, रेलवे ट्रैक जैसे कई पुराने अवशेष बचे हुए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में लोगों ने स्टेशन परिसर में सुरक्षा की कमी का फायदा उठाते हुए वहां मौजूद रेलवे का सारा सामान गायब कर दिया. रेलवे के ऑफिस में पॉल्ट्री फॉर्म खोल लिए गए. आज भी लोदना स्टेशन पर भी ऐसी चोरी जारी है. एक अनुमान के मुताबिक इन स्टेशनों पर लोहे के सामान की अनुमानित कीमत 50 करोड़ से अधिक की थी.

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देश की कोयला राजधानी धनबाद का सदियों पुराना शहर झरिया, जो कभी राजे-रजवाडों की वजह से मशहूर था. आज अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित होने की वजह से बदहाली की कगार पर है. अंग्रेजों ने यहां 1905 में रेलवे लाइन का निर्माण कराया था. आजादी के बाद भारतीय रेल ने इस रेल लाइन को और विकसित करते हुए इसे धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल लाइन में विकसित कर दिया. कोयले की ढुलाई की वजह से जल्द ही यह रेल मार्ग व्यस्ततम रेलमार्गो में शुमार हो गया.

इन इलाकों में कोयला उत्खनन के काम में लगी कोयला कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने साल 2005 में इस रेलवे मार्ग को बंद करने के लिए रेलवे से कहा. वजह थी यहां फैल रही जमीनी आग, जिसके बाद रेलवे ने इस मार्ग को बंद कर दिया. हालांकि रेलवे के सुरक्षाधिकारी के मुताबिक स्टेशन खाली करने के पहले ज्यादातर सामान हटा लिया गया था.

दिलचस्प बात यह है कि झरिया के इसी खंडहर हो चुके रेलवे स्टेशन की दूसरी दिशा में रेलवे का आरक्षण काउंटर चल रहा है. वहां से आज भी रोजाना सैकड़ो यात्रियों को आरक्षण दिया जा रहा है. लेकिन चोरों और अतिक्रमणकारियों का कारनामा यहां आने वाले किसी भी अधिकारियों न तो दिखलाई देता है और न ही उनके कारनामों के किस्से सुनाई देते हैं.

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