झारखंड: नींव की खुदाई में निकले तीर-धनुष, 1857 की क्रांति से जुड़े हो सकते हैं हथियार

घर बनाने के लिए नींव की खुदाई करा रहे शख्स को जमीन से कई चौंकाने वाले चीजें मिली हैं. प्रचीन काल में युद्ध में इस्तेमाल होने वाले धनुष, तीन और गदा मिला है. इसके अलावा कुछ बर्तन भी हैं काफी सामान में जंग लग चुका है कुछ की हालत ठीक है. इन्हें जांच के लिए पुरात्तवविभाग को सौंप दिया है.

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नींव खुदाई के दौरान जमीन से निकले धनुष, तीर और गदा नींव खुदाई के दौरान जमीन से निकले धनुष, तीर और गदा

सत्यजीत कुमार / सतीश शाहदेव

  • झारखंड,
  • 06 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST
  • कुल्हाड़ी, हंसुए जैसा हथियार भी जमीन से निकले
  • पुरातात्विक विभाग को जांच के लिए सौंपे हथियार

झारखंड के लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर घर बनाने के लिए नींव की खुदाई की गई तो जमीन से तीर, धनुष, गदा निकले.  इनमें तीरों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है. इन शस्त्रों को देखकर ऐसा लग रहा है कि प्राचीन काल में इन्हें यहां पर छुपाया गया होगा. जैसे ही इस घटना की सूचना गांव में फैली मौके पर भारी संख्या में लोग इन शस्त्रों को देखने के लिए इकट्ठा हो गए.  

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ब्राह्मणडीहा करंज टोली गांव में रहने वाला सुमंत टाना भगत नाम का शख्स घर बनाने के लिए जेसीबी से नींव की खुदाई करा रहा था. इस दौरान उसे जमीन के अलग-अलग हिस्सों से तीर, धनुष, गदा मिले. बताया जा रहा है कि शुरू में कुछ सामान कुछ समझ नहीं आया और गांव के लोग कुछ सामान उठाकर ले गए.  जब ज्यादा संख्या में हथियार मिलने शुरू हुए तो घर के मालिक ने इन्हें इकट्ठा करना शुरू कर दिया. इनमें करीब दो दर्जन तीर हैं, इसके अलावा कुल्हाड़ी. हंसुए जैसा हथियार भी है. 

अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े भी मिले

अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े हैं. काफी चीजों में जंग लग चुका है पर कुछ की स्थिति अच्छी है. संभावना जताई जा रही है कि इस जमीन में और भी पुरातात्विक महत्व के अवशेष हो सकते हैं. रांची यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्राध्यापक डॉक्टर कंजीव लोचन ने बताया कि इन चीजों का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है. इनके अध्ययन से लोहरदगा और झारखंड के प्राचीन इतिहास से संबंधित नई जानकारी मिल सकती है. किसी भी औजार में छेद नहीं दिख रहा, यह इनके बहुत पुराना होने का लक्षण है. 

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1857 की क्रांति से जुड़े हथियार

एक ही पैटर्न के कई पात्र मिले हैं, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि यह रसोई के अवशेष न होकर किसी लुहार की दुकान के अवशेष हो सकते हैं. अगारिया जनजाति का काम हो सकता है. लोहरदगा कई आंदोलन और सशस्त्र क्रांति की भूमि रहा है.  1831 के लरका आंदोलन, 1857 की क्रांति सहित कई सशस्त्र आंदोलन यहां हुए हैं.  इस दौरान हुए युद्धों का इतिहास में जिक्र मिलता है.  हथियारों के इन प्राचीन अवशेषों को उन्हीं आंदोलनों से जोड़कर देखा जा रहा है. 

10 साल पहले खुदाई के दौरान मिले थे अवशेष

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 10 साल पहले इस स्थान पर सड़क बन रही थी. तब भी जमीन की खुदाई में इस तरह के हथियार और अन्य अवशेष मिले थे. लेकिन उस समय इनकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी और ग्रामीणों ने ही उन्हें इधर-उधर कर दिया था इस बार अवशेषों ने लोगों की उत्सुकता को बढ़ाया है. इन अवशेषों की पुरातात्विक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह इतिहास के किस दौर और घटना से जुड़े हुए हैं. 

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