इस बार विधानसभा में कुल सदस्यों का 65.43 प्रतिशत यानी 53 विधायक ऐसे पहुंचे हैं, जिन्होंने अपने शपथ पत्र में अपनी संपत्ति का ब्योरा करोड़ों में भरा है. लेकिन 2014 विधानसभा चुनावों में ऐसे विधायकों की संख्या 81 में से महज 41 यानी 51 फीसदी की थी.
झारखंड के विधानसभा में दागी विधायक
अगर नये विधायकों के रिकॉर्ड पर नजर डाला जाए तो के 17 विधायकों पर केस दर्ज है. बीजेपी से जीतकर आए ऐसे विधायकों की संख्या 11 है. कांग्रेस के 8 विधायकों पर मुकदमा चल रहा है. जेवीएम के 3 विधायकों पर केस दर्ज हैं. सीपीआईएमल का एक विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, लेकिन उन पर भी केस दर्ज है. एनसीपी और आरजेडी के एक विधायक पर भी केस दर्ज है.
कई विधायकों के खिलाफ CBI जांच
बता दें कि चुनाव से पहले एडीआर की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि 1216 उम्मीदवारों में से 335 पर सामान्य अपराध और 222 के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं. इस बार में चुने गए विधायकों पर जहां लोगों से धोखाधड़ी और अन्य तरह के भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वहीं हुसैनाबाद से एनसीपी से चुने गए कमलेश कुमार सिंह, मांडर से जेवीएम के विधायक बंधु तिर्की और पांकी से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता के खिलाफ विभिन्न मामलों में सीबीआई जांच चल रही है.
कमलेश कुमार सिंह और चतरा से आरजेडी से जीते सत्यानंद भोक्ता पूर्व की राज्य सरकारों में मंत्री रह चुके हैं. सत्यानंद के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चल रहा है. गढ़वा से विधायक मिथलेश ठाकुर के खिलाफ हत्या के आरोप में ट्रायल चल रहा है. सिमडेगा से कांग्रेस विधायक भूषण के खिलाफ महिला से छेड़छाड़ का मुकदमा चल रहा है.
सत्यजीत कुमार