हरियाणा में राज्यसभा चुनाव से पहले 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स'? कांग्रेस अपने विधायक बचाने में जुटी

हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में बीजेपी की एक सीट कन्फर्म है जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है. कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल बन गए हैं, जो इनेलो सहित कांग्रेस के कुछ विधायकों के वोट की उम्मीद लगाए हुए हैं.

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हरियाणा राज्यसभा सीट जीतने के लिए कांग्रेस एक्टिव (Photo-PTI) हरियाणा राज्यसभा सीट जीतने के लिए कांग्रेस एक्टिव (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. बीजेपी से संजय भाटिया तो कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध मैदान में हैं. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरने से कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है. कांग्रेस अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में शिफ्ट करने का प्लान बनाया है. इस तरह राज्यसभा चुनाव में 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' शुरू हो गई है.  

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विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मबीर बौद्ध और निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के बीच वोटिंग के जरिए फैसला होगा. कांग्रेस दो बार राज्यसभा चुनाव में गच्चा खा चुकी है, जिसके चलते इस बार पहले से ही अलर्ट मोड में है. 

हरियाणा की एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या में विधायक हैं, लेकिन बीजेपी की सक्रियता ने सियासी टेंशन बढ़ा दी है. यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों को सेफ जोन में करने के लिए हिमाचल में शिफ्ट करने की रणनीति बनाई है. इस तरह राज्यसभा के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल जारी है. 

राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने में जुटी बीजेपी

हरियाणा की दोनों राज्यसभा सीटें जीतने की कवायद में बीजेपी जुट गतिई है. नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद से केंद्रीय ऊर्जा और शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर चंडीगढ़ में डेरा डाल रखे हैं. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले दिनों पंचकूला में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ औपचारिक मीटिंग की. इस दौरान राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई. बीजेपी ने केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को हरियाणा भेजा है. 

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बीजेपी को दोनों राज्यसभा सीटें जीतने के लिए 62 विधायक का वोट चाहिए, लेकिन पार्टी के पास फिलहाल 48 विधायक हैं. एक सीट जीतने के बाद बीजेपी के पास 17 वोट बच रहे हैं और उसे दूसरी सीट जीतने के लिए 14 वोटों की अतिरिक्त जरूरत है. ऐसे में इनेलो के दो विधायक और तीन निर्दलीय विधायकों को बीजेपी अपने साथ मिला लेती है तो भी उसे 9 विधायकों के वोट का जुगाड़ करना होगा. ऐसे में बीजेपी के पास सिर्फ कांग्रेस में सेंधमारी किए बिना संभव नहीं है. बीजेपी अब इसी कवायद में अपना दांव चल रही है. 

कांग्रेस के सामने विधायकों को बचाए रखने की चुनौती

हरियाणा में दो बार देखा जा चुका है कि कांग्रेस के पास संख्याबल होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव में उसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था. यही वजह है कि कांग्रेस अलर्ट हो गई है और विधायकों को बचाए रखने की कवायद में जुट गई है. हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी सोमवार से ही चंडीगढ़ में डेरा जमा रखा है. उनकी हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पार्टी प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध के साथ बंद कमरे में राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई. 

विधानसभा में नेता विपक्ष और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई. इस बैठक में कांग्रेस के पांच विधायक शामिल नहीं हुए. कांग्रेस विधायकों की गैर हाजिरी ने पार्टी की सियासी टेंशन बढ़ा दी है, जिसके चलते पार्टी अलर्ट हो गई है. कांग्रेस ने अपने सभी 37 विधायकों को शुक्रवार को डिनर देने का प्लान बनाया है. इस दौरान विधायकों को हिमाचल शिफ्ट करने को लेकर फैसला लिया जाएगा. 

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कांग्रेस अब नहीं दोहराना चाहती पुरानी गलती

राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व इस बात से चिंतित है कि विधायक दल बैठक में 37 विधायकों में से 32 ने ही भाग लिया.  जुलाना से कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट, बादली के विधायक कुलदीप वत्स, ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बेनीवाल, कैथल के विधायक आदित्य सुरजेवाला और पंचकूला के विधायक चंद्र मोहन बिश्नोई विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे थे. सुरजेवाला और बिश्नोई को हुड्डा विरोधी खेमे का विधायक माना जाता है.  

कांग्रेस ने अपने सभी 37 विधायकों को चंडीगढ़ में डिनर पर बुलाया है. कांग्रेस को अपने उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत सुनिश्चित करने के लिए 31 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है. बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग पर भरोसा कर रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट करने और बीजेपी के पाले में जाने से बचाने के लिए सारी कवायद शुरू कर दी है. 

कांग्रेस ने 13 मार्च को पार्टी विधायकों को फिर से रात्रिभोज के लिए बुलाया है, जिसमें आगे की कार्य योजना बनाई जाएगी. इनेलो के दो विधायकों अर्जुन चौटाला व आदित्य देवीलाल को अपने पाले में लाने को लेकर जहां बीजेपी पूरी तरह से आशान्वित है, वहीं कांग्रेस भी समर्थन पाने के लिए कर प्रयास कर रही है. भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और जो विधायक बैठक में नहीं आए, उन्हें कोई काम रहा होगा. कांग्रेस के सभी विधायक पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को वोट करेंगे. 

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