पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले की रहने वाली एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे को लेकर विवाद बढ़ गया है. गुरुग्राम में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली ज्योत्सना बीबी को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में अब पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समुदाय के कई प्रमुख नेताओं ने भी महिला के कथित कृत्य की आलोचना की है.
गुरुग्राम पुलिस के अनुसार, ज्योत्सना बीबी को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि महिला ने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने दावा किया था कि उसने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के लिए बीफ पकाया था. वीडियो सामने आने के बाद इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.
पुलिस के मुताबिक शिकायत के आधार पर गुरुग्राम के सेक्टर-29 थाने में एफआईआर दर्ज की गई. इसके बाद महिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले में उसकी जमानत याचिका पर स्थानीय अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने मंगलवार को जमानत अर्जी खारिज कर दी. अब मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित की गई है.
मुस्लिम नेताओं ने भी महिला के कथित कृत्य की आलोचना की
जांच के दौरान पुलिस ने महिला का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है. मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है.
इस बीच पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं ने भी महिला के कथित बयान और कृत्य को गलत बताया है. कोलकाता की प्रसिद्ध नाखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक क़ासमी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी कार्य का समर्थन नहीं करते जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाए. उन्होंने कहा कि ऐसे काम उचित नहीं हैं और कानून को अपना काम करने देना चाहिए.
इमाम ने कहा कि किसी भी समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करने वाले कदमों का समर्थन नहीं किया जा सकता. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और वही अंतिम निर्णय करेगा.
वहीं मैसूर फैमिली फातेहा फंड वक्फ एस्टेट के सचिव मोहम्मद शहीद आलम ने भी महिला के कथित कृत्य की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह गलत है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह ध्यान आकर्षित करने या चर्चा में आने की कोशिश थी. उन्होंने कहा कि यदि किसी को किसी बात पर आपत्ति या नाराजगी है तो उसे व्यक्त करने के अन्य तरीके भी होते हैं.
शाहिद आलम ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति को भी इस तरह कुछ पेश नहीं किया जाता, ऐसे में किसी राजनीतिक नेता के संदर्भ में ऐसा दावा करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कदम अक्सर सुर्खियां बटोरने के उद्देश्य से उठाए जाते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कानून इस मामले में अपना काम करेगा.
पुलिस के अनुसार वीडियो में महिला ने यह भी कहा था कि उसे कुर्बानी करने की अनुमति नहीं मिली थी, जिसके बाद उसने यह कदम उठाया. इसी कथित बयान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई और उसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई.
धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज हुई एफआईआर
फिलहाल महिला न्यायिक हिरासत में है और पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है. फोरेंसिक जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा जारी है. मुस्लिम समुदाय के कई नेताओं की ओर से आए बयानों ने यह संकेत दिया है कि वो भी ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करते जिसे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना जाए.
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