'लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने की कोशिश की...', जनसंबोधन में बोले PM मोदी

गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा कि ये दिन भारत की आजादी और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है. इस दौरान उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण और राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस का भी जिक्र किया, जो भारत की शक्ति और संकल्प को दिखाता है.

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PM मोदी सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ में शामिल हुए थे. (Photo- X/BJP4India) PM मोदी सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ में शामिल हुए थे. (Photo- X/BJP4India)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के आज 75 साल पूरे हो गए हैं. इस खास मौके पर 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' का आयोजन किया गया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की. पीएम मोदी ने इस दिन को भारत की आजादी की भावना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बताया.

जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इतिहास को याद करते हुए कहा कि 75 साल पहले सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कोई साधारण घटना नहीं थी, भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ था, लेकिन 1951 में सोमनाथ मंदिर की 'प्राण प्रतिष्ठा' ने पूरी दुनिया को भारत की असली आजादी का संदेश दिया था.

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पीएम मोदी ने कहा कि ये आयोजन इस बात का ऐलान था कि भारत सिर्फ स्वतंत्र ही नहीं हुआ, बल्कि अपनी प्राचीन गरिमा को वापस पाने की राह पर भी चल पड़ा है.

सरदार पटेल का ऐतिहासिक योगदान

प्रधानमंत्री ने देश की एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन किया. उन्होंने कहा कि आजादी के समय सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को एकजुट कर आधुनिक भारत का स्वरूप गढ़ा था. सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी उन्हीं के संकल्प का नतीजे था. इसके जरिए उन्होंने दुनिया को बताया कि भारत अपनी विरासत पर गर्व करना जानता है.

भगवान सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में अपनी भावनाओं को साझा करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए. उन्होंने कहा, 'दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं कितनी बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं. लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी. समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो खुद कालातीत हैं, जो खुद काल स्वरुप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 साल मना रहे हैं.'

प्रधानमंत्री ने भगवान शिव की महिमा का जिक्र करते हुए कहा, 'जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है. ये सब भगवान सदाशिव की ही क्रीड़ा है.'

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'लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने की...'

PM मोदी ने आगे कहा, 'लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने की कोशिश की. वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे! बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया. ये बार-बार बनता रहा. हर बार उठ खड़ा होता रहा! क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था कि हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है. हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं. उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है और शिव तो सर्वात्मा हैं.'

पोखरण परीक्षण को किया याद

पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस को लेकर कहा, 'आज का दिन एक और वजह से भी खास है. 11 मई, 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए. हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा. दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें.'

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी, कई तरह के बंधन लग गए, आर्थिक संभावनाओं के सारे रास्ते बंद कर दिए गए. 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी. लेकिन 13 मई को फिर 2 और परमाणु परीक्षण हुए थे. उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है. उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था.

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पीएम मोदी कहते हैं, 'लेकिन अटल जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है. दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती. देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपेरशन शक्ति नाम दिया था. क्योंकि, शिव के साथ शक्ति की आराधना ही हमारी परंपरा रही है.'

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