'सिर्फ सेना के बल पर मुद्दों का हल नहीं...', फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ दिल्ली में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. दोनों देश एआई (AI) से लेकर क्लीन एनर्जी तक के क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने की बात कही.

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दिल्ली में पीएम मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपित ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. (Photo: X/@BJP) दिल्ली में पीएम मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपित ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. (Photo: X/@BJP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने ज्वाइंट प्रेस कॉनफ्रेंस को संबोधित किया. पीएम मोदी ने बताया कि साल 2026 की शुरुआत में हुआ ऐतिहासिक भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और प्रबल करेगा. भारत और फिनलैंड अब अपने संबंधों को डिजिटलीकरण और सस्टेनेबिलिटी में एक रणनीतिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं. 

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यह साझेदारी 6G टेलीकॉम से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे हाई-टेक सेक्टरों में सहयोग को ऊर्जा देगी.

दोनों नेताओं ने शांति और कूटनीति पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार अब अनिवार्य और तत्काल आवश्यक हो गया है.

हाई-टेक क्षेत्रों में साझी ताकत

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत-फिनलैंड की यह नई पार्टनरशिप भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 6G टेलीकॉम, क्लीन एनर्जी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इन क्षेत्रों में आपसी सहयोग से न केवल तकनीक का विकास होगा, बल्कि निवेश और व्यापार के नए रास्ते भी खुलेंगे. यह रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों को तकनीकी रूप से और ज्यादा आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

नरेंद्र मोदी ने कहा, "फिनलैंड भारतीय स्टूडेंट्स और टैलेंट के लिए एक प्रिफर्ड डेस्टिनेशन बन रहा है. दोनों देशों के इनोवेशन इको-सिस्टम को जोड़ने के लिए आज हमने फिनलैंड के साथ एक व्यापक माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट किया है. इसके साथ हम जॉइंट रिसर्च एंड स्टार्टअप सहयोग को भी और मजबूत करने जा रहे हैं."

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम एकमत हैं कि केवल मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता. यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे. हम इस बात पर भी एकमत हैं, कि बढ़ते हुए ग्लोबल चैलेंज के समाधान के लिए ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स का सुधार, आवश्यक ही नहीं, अर्जेंट भी है."

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'सिर्फ़ मिलिट्री लड़ाई से हल नहीं...'

हम इस बात से सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा सिर्फ़ मिलिट्री लड़ाई से हल नहीं हो सकता. चाहे यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, हम लड़ाई को जल्दी खत्म करने और शांति बहाल करने की हर कोशिश का सपोर्ट करते रहेंगे.

हम इस बात से भी सहमत हैं कि बढ़ती ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए, ग्लोबल संस्थाओं में सुधार बहुत ज़रूरी है. और आतंकवाद को उसके सभी रूपों में खत्म करना हमारा साझा वादा है.

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शांति और कूटनीति का संदेश

यूक्रेन और पश्चिमी एशिया के संघर्षों पर बात करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही 'रूल ऑफ लॉ' और संवाद में विश्वास रखते हैं. उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. दोनों देश संघर्षों की जल्द ही समाप्ति और शांति की कोशिशों को सपोर्ट करते रहेंगे. इसके साथ ही, आतंकवाद के हर रूप को जड़ से खत्म करना और ग्लोबल इंस्टीट्यूशंस में सुधार करना दोनों देशों की साझी प्रतिबद्धता है.

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