अपने सभी सूत्रों से बात करने के बाद, मुझे अंदाज़ा हो गया था कि 26 मई का दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. इसलिए मैंने अपने ब्यूरो चीफ, मुनीश पांडे, से अनुरोध किया कि वे मेरी यूनिट का समय पहले करवाकर सुबह 8 बजे का कर दें, ताकि हमसे कोई भी हलचल न छूटे.
जब मैं यह खबर लिख रहा हूं, तो साफ है कि आज की बैठक की अहमियत को लेकर मेरा अंदाज़ा बिल्कुल सटीक था, क्योंकि हर दिन ऐसा नहीं होता जब कोई पार्टी अपने मौजूदा मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने को कहे, जैसा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मामले में हुआ, मेरी तैनाती कर्नाटक भवन में की गई थी, जहां मुख्यमंत्री और उनके 'किचन कैबिनेट' के ज्यादातर सदस्य ठहरे हुए थे. हर कोई आलाकमान के साथ होने वाली इस बड़ी बैठक का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था, जिसे कई लोग काफी समय से लंबित मान रहे थे.
सुबह करीब 10 बजे, मैंने यह जानने के लिए अपने सूत्र को फोन किया कि क्या यह वाकई राज्यसभा और एमएलसी उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए बुलाई गई कोई आम बैठक है, जैसा कि एआईसीसी नेताओं द्वारा बताया जा रहा था. उस सूत्र ने, बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि बाकी सारी बातें तो बस दिखावा हैं.
आलाकमान के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की यह बैठक असल में उनका भविष्य तय करने वाली है कि क्या वह मुख्यमंत्री के रूप में अपने बाकी बचे 2 साल पूरे करेंगे या फिर राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा. मैंने तुरंत यह जानकारी अपने ग्रुप में डाली, नेटवर्क के लिए एक लाइव किया और शुक्र है कि मेरी सहकर्मी ऐश्वर्या पालीवाल ने ट्विटर पर भी मेरा यह 'फ्लैश' मेरे नाम के साथ पोस्ट कर दिया कि दिन खत्म होने तक हर किसी को मुख्यमंत्री के कार्यकाल को लेकर बिल्कुल साफ तस्वीर मिल गई.
कर्नाटक का सियासी ड्रामा!
करीब 10 बजे डीके शिवकुमार कर्नाटक भवन पहुंचे और हमेशा की तरह मुस्तैद मैंने उनसे सीधे यही सवाल दाग दिया कि क्या राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है? इस पर डीके 'इंडिया टुडे' के कैमरे की तरफ मुड़े, मुस्कुराए और हाथ जोड़कर नमस्ते किया. हम जैसे मीडियाकर्मियों के लिए यह एक बड़ा इशारा था कि उन्हें सत्ता परिवर्तन की कुछ न कुछ भनक ज़रूर है.
फिर मैं पुरानी कर्नाटक बिल्डिंग गया जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ठहरे हुए थे, मैंने उनके एक करीबी सहयोगी से कहा कि मुझे इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक से पहले मुख्यमंत्री से मिलने के लिए सिर्फ 2 मिनट चाहिए. वहां मुझे एक और इशारा मिला, जब मुझसे कर्नाटक भवन की पुरानी बिल्डिंग की चौथी मंजिल से चले जाने के लिए विनम्रतापूर्वक कहा गया जहां सिद्धारमैया रुके हुए थे, क्योंकि शायद 'वह सहज महसूस नहीं कर रहे थे.' यह एक और हिंट था कि मुख्यमंत्री परेशान थे और नहीं चाहते थे कि मीडिया उन्हें अचानक घेरे.
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करीब 10:30 बजे दोनों नेता इंदिरा भवन के लिए रवाना हुए, जहां यह बैठक होनी तय थी. हम भी उनके पीछे-पीछे इंदिरा भवन पहुंचे, लेकिन हमें पता चला कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को करीब 90 मिनट तक इंतज़ार करने के लिए कहा गया और उसके बाद ही मौजूदा मुख्यमंत्री को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के साथ चर्चा में शामिल होने के लिए बुलाया गया. यह सारा घटनाक्रम उस वक्त चल रहा था जब राष्ट्रीय राजधानी में भयंकर गर्मी पड़ रही थी और इंदिरा भवन के बाहर पारा 45 से 50 डिग्री के बीच झुलस रहा था.
तभी मुझे अपने एक शीर्ष सूत्र से मैसेज मिला कि इंदिरा भवन की पांचवीं मंजिल पर बने अपने चैंबर में राहुल गांधी, सिद्धारमैया के साथ अकेले बैठक कर रहे हैं. यह हमारे लिए पहला सबसे बड़ा और पक्का इशारा था कि यह बैठक राज्यसभा या एमएलसी चुनावों को लेकर नहीं थी, जैसा कि कुछ नेता मीडियाकर्मियों को गुमराह कर रहे थे.
जब यह सब चल रहा था, हम बुलेटिन के लिए इस भीषण और झुलसाने वाली गर्मी में लगातार लाइव्स देने के लिए खड़े थे, लेकिन हममें से किसी ने कोई शिकायत नहीं की, क्योंकि बीजेपी के उलट, कांग्रेस अपने मुख्यमंत्रियों को इतनी जल्दी-जल्दी नहीं बदलती. एआईसीसी (AICC) मैनेजमेंट का शुक्रिया कि उन्होंने मीडिया रूम खोल दिया ताकि रिपोर्टर्स गर्मी से बच सकें, और वहां जलपान का भी इंतज़ाम किया गया था. कुछ घंटों के लिए हलचल थोड़ी धीमी हुई और फिर शाम के करीब 5 बज गए, जब यह बैठक आखिरकार खत्म हुई.
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हम सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से कुछ सुनने के लिए बाहर की तरफ भागे, हालांकि, आधिकारिक बयान वेणुगोपाल और सुरजेवाला की तरफ से आया कि अटकलें लगाने की कोई ज़रूरत नहीं है और करीब 6 घंटे तक चली यह मैराथन बैठक मुख्य रूप से राज्यसभा और एमएलसी चुनावों के लिए ही थी. कम से कम मैं तो इस बात को पचाने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि पिछले लगभग 5 सालों से कांग्रेस बीट कवर करने के दौरान मैंने राज्यसभा और एमएलसी चुनावों के लिए इतनी लंबी चलने वाली कोई बैठक नहीं देखी थी. साफ था कि एजेंडा इससे कहीं आगे का था.
तभी सहकर्मी मौसमी सिंह ने यह खबर ब्रेक की कि बैठक के दौरान सिद्धारमैया से इस्तीफा देने को कहा गया है. मुझे भी मेरे सूत्र का फोन आया जिसने इस बात की पुष्टि की. कई लोगों के लिए तकनीकी तौर पर सत्ता का यह बदलाव इसी छोटे से बयान के साथ शुरू हो गया था और उन्होंने इशारा किया कि यह मुख्यमंत्री के सफर का अंत है और पूरी संभावना है कि अब उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा.
इसके बाद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों बिना एक शब्द बोले इंदिरा भवन से निकल गए, जिससे हर कोई बस अंदाज़े ही लगाता रह गया. हमें बताया गया कि मुख्यमंत्री बेंगलुरु जाने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट की तरफ निकल रहे हैं, जबकि डीके शिवकुमार कर्नाटक भवन जा रहे हैं. मैंने कर्नाटक भवन तक डीके का पीछा करने का फैसला किया.
वहां डीके के एक करीबी सहयोगी ने, जिन्होंने डीके से मुलाकात की थी, मुझे बताया कि डीके अभी भी 'खुश नहीं' हैं क्योंकि उन्हें साफ तौर पर यह नहीं बताया गया है कि वही अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. कुछ ही देर बाद, कर्नाटक के एक मौजूदा वरिष्ठ मंत्री का आज शाम मेरे पास फोन आया और उन्होंने कहा, 'मैंने सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल में भी उनके अधीन काम किया है, लेकिन अब वह पहले वाले सिद्धारमैया नहीं रहे. उम्र उनके साथ नहीं है और उनके अच्छे दिन पीछे छूट चुके हैं. लेकिन, अगर वह पांच साल और युवा होते, तो वह इस स्थिति को भी संभाल ले जाते. '
राहुल गौतम