दिल्ली सरकार के 2,000 स्टैंडर्ड फ्लोर बस खरीदने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर DTC और DIMTS के लिए दो हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बस खरीदने का फैसला क्यों किया गया, जबकि ये बुजुर्गो और दिव्यांगों के लिए असुविधाजनक है.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि सरकार Low floor बसें क्यों नहीं खरीद रही है. ऐसी बसे बुजुर्गों और दिव्यांगों के साथ सभी के लिए आरामदायक और सुविधाजनक होती हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर 14 नवंबर तक ज़वाब मां है.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है कि दिल्ली सरकार ने ट्रांसपोर्ट के लिए दिल्ली में 2000 स्टैंडर्ड फ्लोर खरीदने का फैसला किया है. लिहाजा सरकार के इस आदेश पर फौरन रोक लगाई जाए, क्योंकि ये बुजुर्गो और दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक नहीं है. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा है कि स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने का फैसला लेते वक़्त बुजुर्गों और विकलांगों को नजरअंदाज क्यों किया गया?
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सरकार की स्टैंडर्ड फ्लोर बसों को खरीदने की अबतक की नीतियों को लेकर हैरान हैं. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में करीब दो लाख 34 हज़ार दिव्यांग हैं, जो दिल्ली की कुल जनसंख्या का तकरीबन दो फीसदी हैं. ऐसे में सार्वजनिक परिवहन में आखिर इनको नज़रअंदाज़ कैसे किया जा सकता है?
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि सरकार इसके लिए 300 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दे चुकी है, जिस पर कोर्ट को तुरंत रोक लगानी चाहिए. दिल्ली में को फ़िलहाल सुधारने के लिए बड़ी संख्या मे बसों की ज़रूरत है, लेकिन बड़ी समस्या यह भी है कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों मे सड़कें ठीक नहीं है और मुख्य शहर में पहले से ही जाम की समस्या है.
पूनम शर्मा