'13 लेयर की बैरिकेडिंग? ऐसी सुरक्षा तो मैंने पाक बॉर्डर पर भी नहीं देखी' गाजीपुर पहुंचकर बोलीं हरसिमरत

विपक्ष के सांसदों की टीम में अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके सांसद कनिमोझी, टीएमसी सांसद सौगत रॉय शामिल रहे. इन सांसदों को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से पहले ही रोक दिया था.

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गाजीपुर बॉर्डर पर विपक्ष के सांसद गाजीपुर बॉर्डर पर विपक्ष के सांसद

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST
  • 8 दलों के सांसद पहुंचे गाजीपुर बॉर्डर
  • दिल्ली पुलिस ने सांसदों को रोका

दिल्ली का गाजीपुर ब़ॉर्डर फिर सियासत के केंद्र में हैं. आज वहां विपक्षी नेताओं का एक दस्ता आज वहां पहुंचा. इसमें 8 राजनीतिक दलों के सांसद थे. सांसदों ने हालात का जायजा लिया. किसानों की मुश्किलें जानीं. गाजीपुर पहुंचे सभी विपक्षी सांसद, अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मिलेंगे और उन्हें पूरा हाल बताएंगे.

विपक्ष के सांसदों की टीम में अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके सांसद कनिमोझी, टीएमसी सांसद सौगत रॉय शामिल रहे. इन सांसदों को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से पहले ही रोक दिया था. बाद में सांसदों ने कुछ किसान नेताओं से मुलाकात की और उनकी तकलीफ को समझा.

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इस मौके पर अकाली दल से सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि यहां 3 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग लगी हुई हैं, ऐसे में किसानों की क्या हालत हो रही होगी, हमें भी यहां रोका जा रहा है हमें भी उनसे मिलने नहीं दे रहे ,13 लेवल की बैरिकेडिंग की गई है, इतना तो हिंदुस्तान के अंदर पाकिस्तान बॉर्डर पर भी नहीं है, हमें संसद में भी इस मुद्दे को उठाने का मौका नहीं दिया जा रहा है.

विपक्ष के 15 सांसद दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे हुए थे, तभी बॉर्डर से कीलें उखाड़ी जा रही थी. एक तरफ सांसदों को बैरिकेड की दूसरी तरफ यानी दिल्ली की साइड में रोक दिया गया था, दूसरी तरफ यानी गाजियाबाद की ओर लोहे के कीलों की इन पट्टियों को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ. सिर्फ एक ही कर्मचारी सबको हटा रहा था.

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जब उससे आज तक ने बात की तो जवाब मिला, 'मैं एक दुकान से आया हूं और मुझे कहा गया है कि इन कीलों को यहां से हटा दिया जाए, लेकिन मुझे यह नहीं पता कि आखिरकार किसके आदेश पर इसे हटाया जा रहा है.' तब तक वहां आसपास के किसान भी इकट्ठा होने लगे, जो पहले ही इस बात से नाखुश थे कि उन्हें रोकने के लिए ऐसे सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

तकरीबन आधे घंटे तक चले इस पूरी प्रक्रिया के बाद कीलो की लगी पट्टियां तो हटा ही दी गई है. बाद में पूर्वी दिल्ली के एक सीनियर अधिकारी ने आज तक से बात करते हुए बताया कि कीलों को सिर्फ उन रास्तों से हटाया गया है, जहां पर आवाजाही में पब्लिक को परेशानी आ रही थी, हम इन्हें दोबारा उन सड़कों पर लगाएंगे, जहां इनकी जरूरत महसूस होगी.

 

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