देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर बनाना आम आदमी के लिए किसी सपने से कम नहीं है, लेकिन अब दिल्लीवालों का यह सपना आसानी से पूरा हो सकेगा. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पानी और सीवर से जुड़े IFC (Infrastructure Fund Charges) नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए लाखों लोगों को बहुत बड़ी राहत दी है.
नए नियमों के तहत अब IFC चार्ज प्लॉट के आकार पर नहीं, बल्कि पानी की वास्तविक जरूरत के आधार पर तय किए जाएंगे. सरकार के इस फैसले से विशेष रूप से छोटे प्लॉट, छोटे फ्लैट, अनधिकृत कॉलोनियों और मिडिल क्लास परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा.
पहले दिल्ली में नया घर बनाने या नक्शा पास कराने के दौरान आम आदमी पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता था. पुराने नियमों के मुताबिक प्लॉट बड़ा होने पर IFC चार्ज भी ज्यादा लगते थे, भले ही वहां पानी की खपत या जरूरत बेहद कम हो. इस भारी-भरकम शुल्क के डर से कई मिडिल क्लास परिवार अपने घर में नया फ्लोर जोड़ने या मरम्मत का काम कराने से पीछे हट जाते थे, जिससे उनका अपने घर को बड़ा करने का सपना अधूरा रह जाता था.
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'जितनी जरूरत, उतना शुल्क'
नई नीति के लागू होने के बाद अब दिल्ली में 'जितनी जरूरत, उतना शुल्क' का व्यावहारिक सिद्धांत काम करेगा. नए नियम के तहत IFC चार्ज केवल इस बात पर तय होंगे कि उस परिसर में पानी की जरूरत कितनी है. इसके अलावा, यह चार्ज केवल नए बन रहे मकानों या पुराने मकान में किए जाने वाले अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा. राहत की बात यह भी है कि पार्किंग, आंगन और खुली जगह जैसी नॉन-एफएआर जगहों पर अब कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा.
छोटे मकान मालिकों और मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा फायदा
सरकार के मुताबिक, इस ऐतिहासिक बदलाव से कई मामलों में लोगों के लाखों रुपये तक बच सकते हैं. इसका सबसे सीधा लाभ दिल्ली के छोटे मकान मालिकों, मिडिल क्लास परिवारों और विशेष रूप से E, F, G, और H कैटेगरी की कॉलोनियों के निवासियों को मिलेगा. इसके साथ ही, दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए भी अब घर निर्माण की राह आसान हो जाएगी.
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले पर कहा कि पहले IFC चार्ज परिसर के आकार के आधार पर लगाए जाते थे, जिससे जनता पर अनावश्यक बोझ पड़ता था. अब सरकार ने इसे पारदर्शी बनाते हुए जल आवश्यकता से जोड़ दिया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव से न केवल लोगों के पैसों की बचत होगी और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि निचले स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार पर भी पूरी तरह रोक लगेगी.
रियल एस्टेट सेक्टर और निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार
इस फैसले का दिल्ली के विकास पर बेहद सकारात्मक असर देखने को मिलेगा. अब दिल्ली में घर बनाना, नया फ्लोर जोड़ना या घर का विस्तार करना काफी किफायती हो जाएगा, इसके परिणामस्वरूप निर्माण और मरम्मत के कामों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे. साथ ही, इस व्यावहारिक बदलाव से दिल्ली के रियल एस्टेट सेक्टर और हाउसिंग मार्केट को भी एक नई मजबूती मिलेगी.
सुशांत मेहरा