जापानी राजदूत ओनो केइची ने बताया 10 ट्रिलियन येन के निवेश का रोडमैप

भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने स्पष्ट किया कि भारत-जापान संबंध अब केवल खूबसूरत शब्दों और कागजी दावों से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में धरातल पर ठोस सहयोग में बदल चुके हैं.

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ओनो केइची ने कहा हम स्वाभाविक साझेदार हैं (अतुल कुमार यादव/इंडिया टुडे) ओनो केइची ने कहा हम स्वाभाविक साझेदार हैं (अतुल कुमार यादव/इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया टुडे इंडो-जापान कॉन्क्लेव' में भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने दोनों देशों के बीच 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश के रोडमैप पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने भारत-जापान संबंधों को टोक्यो की नई 'मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत' (Free and Open Indo-Pacific) रणनीति के दायरे में देखते हुए कुछ बड़े आंकड़े भी साझा किए. 

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उन्होंने कहा कि भारत लगातार चार वर्षों से जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा जगह रहा है. जापानी राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों की साझेदारी अब केवल कागजी दावों से आगे निकल चुकी है. उन्होंने 'भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल' और उसके 5 मुख्य क्षेत्रों सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज , सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT), क्लीन एनर्जी और फार्मास्यूटिकल्स का जिक्र करते हुए कहा, "हम केवल खूबसूरत शब्दों और सिद्धांतों पर सहमत होने के दौर से आगे बढ़कर अब अपने निजी क्षेत्रों के बीच ठोस सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं."

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ओनो ने बताया कि जापानी कंपनियां गुजरात के धोलेरा और असम के जागीरोड में बन रहे सेमीकंडक्टर पार्कों में काम कर रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 26 मई को नई दिल्ली में 'क्वाड' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने जा रही है. उन्होंने कहा, "हम प्राकृतिक और एक-दूसरे के पूरक साझेदार हैं.' जापान को भारत की जरूरत है और भारत को जापान की, अगला साल दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का है. 

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इस मौके पर दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने जापानी साझेदारी के साथ दिल्ली के जमीनी अनुभव को साझा किया. उन्होंने कहा, "इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली मेट्रो है. यह सिर्फ एक परिवहन प्रणाली नहीं है, बल्कि कार्यकुशलता, समयबद्धता, सुरक्षा और स्थिरता का एक बेहतरीन मॉडल है." उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े और भरोसेमंद मेट्रो नेटवर्क में से एक को बनाने का श्रेय जापान के सहयोग को दिया.

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