दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 35 साल से पुलिस के साथ लुका-छिपी खेल रहे क़त्ल के एक आरोपी को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार किया है. दरअसल 2 अगस्त 1991 को दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में कॉल आई, कॉलर ने बताया कि पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में किसी ने घर के अंदर मां और बेटे को चाकू मारकर बुरी तरह घायल कर दिया है. पुलिस ने मौके पर पहुंच कर तुरंत दोनों को हॉस्पिटल पहुंचाया, लेकिन मां की मौत हो गई. जबकि कई दिनों के इलाज के बाद बेटे की जान बच गई थी.
आरोपी ने दोनों के गले और चेहरे पर चाकू से कई गंभीर वार किए थे. डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम ने बताया कि उस वक़्त जब बेटे को होश आया तो उसने बयान दिया था कि ये हमला उसके किराएदार छवि लाल वर्मा ने किया था. छवि वर्मा को पता लग चुका था कि बेटे की जान बच गई है और वो पकड़ा जाएगा. इसलिए छवि लाल फरार हो गया. पुलिस ने लगातार छवि लाल की तलाश की, लेकिन छवि लाल पलट के घर तक नहीं आया.
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पत्नी और बच्चों पर नजर रख रही थी पुलिस
पुलिस की टीम यूपी सुल्तानपुर छवि लाल के घर के चक्कर काटती रही और छवि लाल के बच्चों और पत्नी पर नज़र रखी. लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस भी हैरत में थी कि छवि लाल ने आखिर कभी परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया. वक़्त बीतने के साथ छवि लाल की तलाश भी बंद हो गई. 35 साल बाद जब क्राइम ब्रांच ने पुरानी फ़ाइल खंगालनी शुरू की तो उसमें छवि लाल की फ़ाइल भी मिली. अब से 6 महीने पहले क्राइम ब्रांच की टीम ने छवि लाल की तलाश के लिए इनपुट जुटाना शुरू किया.
इसी दौरान पुलिस को पता लगा कि छवि लाल ने कभी भी अपनी पत्नी को कॉल नहीं किया. ये अपने बच्चों की शादी तक में नहीं आया था. इसके बाद पुलिस ने उसके गांव पर फिर नजर रखनी शुरू की. फिर वहीं से पुलिस को लीड मिली और उसे 9 अप्रैल को लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में छवि लाल ने बताया कि उसे लगता था कि उसकी मकान मालकिन के पास बहुत पैसा है, इसलिए उसने लूट और क़त्ल की सजिश रची थी.
घरवालों से पड़ोसी करवाता था बात
छवि लाल को कभी अपनी पत्नी से बात करनी होती तो वो पड़ोसी को कॉल करता, अपना मैसेज बताता. जिसके बाद वो मैसेज पड़ोसी उसकी पत्नी को देता और जो जवाब होता वो पड़ोसी ही छवि लाल को बता देता. पिछले 35 सालों में अपनी फरारी के दौरान छवि लाल कभी पेंटर का काम किया, तो कभी मिस्त्री का. कभी किसी होटल में काम किया तो कभी मजदूरी की.
35 सालों में कभी गोवा, कभी बंगाल तो कभी महाराष्ट्र
पुलिस के डर से वो कहीं एक जगह टिकता नही था. वह कभी गोआ, कभी नागपुर, कभी पंजाब, कभी पश्चिम बंगाल भागता ही रहता था. आखिरकार छवि का भागना और पुलिस की तलाश 9 अप्रैल को लुधियाना में खत्म हुई. जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
हिमांशु मिश्रा