'सवालों को टाल रहे थे सिसोदिया, नहीं कर रहे थे जांच में सहयोग,' गिरफ्तारी पर CBI का बयान

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रविवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया है. उनसे दिन में आठ घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की गई. दिल्ली में आबकारी नीति में घोटाले के मामले में सिसोदिया आरोपी हैं. CBI ने उन्हें धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 477 ए (धोखाधड़ी करने का इरादा) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गिरफ्तार किया है.

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सीबीआई की पूछताछ से पहले दिल्ली के उपमुख्यपमंत्री मनीष सिसोदिया ने समर्थकों का अभिवादन किया. (फोटो- पीटीआई) सीबीआई की पूछताछ से पहले दिल्ली के उपमुख्यपमंत्री मनीष सिसोदिया ने समर्थकों का अभिवादन किया. (फोटो- पीटीआई)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 6:21 AM IST

दिल्ली में आबकारी नीति में घोटाले के मामले में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने बयान जारी किया है. सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि सबूत सामने रखे जाने के बावजूद सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे. उसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है. आगे कोर्ट में पेश किया जाएगा और हिरासत में पूछताछ की जाएगी.

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सीबीआई ने बताया कि साल 2021-22 के लिए आबकारी नीति को तैयार करने एवं कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं और निजी व्यक्तियों को टेंडर दिए जाने के मामले में जांच की जा रही है. इस केस में दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री और प्रभारी आबकारी मंत्री के अलावा 14 अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया था. जांच एजेंसी ने 25 नवंबर को कोर्ट में मुंबई की एक निजी कंपनी के तत्कालीन सीईओ और 6 अन्य के विरुद्ध चार्जशीट दायर की है. इस मामले में आगे की जांच की जा रही है.

'सबूतों को सामने रखे जाने के बावजूद जांच में नहीं किया सहयोग'

सीबीआई ने यह भी बताया कि उप मुख्यमंत्री को 19 फरवरी 2023 को जांच में शामिल होने के लिए सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए एक सप्ताह का समय मांगा. उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए 26 फरवरी 2023 को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया. सिसोदिया ने जिन सवालों के जवाब पहले राउंड (17 अक्टूबर 2022) की पूछताछ में टाल दिए थे, उनके बारे में फिर से पूछा गया. इसके अतिरिक्त,  मामले की जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों के आधार उनकी अपराधिक (incriminating) भूमिका से सम्बंधित पूछताछ करनी थी. लेकिन, उन्होंने टालमटोल भरे जवाब दिए और सबूतों का सामना किए जाने के बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया. गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा.

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