दिल्ली में कमर्शियल LPG की कमी से हाहाकार, रेस्टोरेंट-होटल की हालत खराब

दिल्ली में LPG सिलेंडर की किल्लत ने खाने-पीने के कारोबार की कमर तोड़ दी है. एक हफ्ते से ज्यादा समय बीतने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं. रेस्टोरेंट से लेकर स्ट्रीट फूड विक्रेता तक सभी सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हैं. उनको अपने मेनू में भारी कटौती करनी पड़ी है.

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LPG की किल्लत से रोजगार पर संकट, दिल्ली का फूड सेक्टर संकट से गुजर रहा है. (Photo-Pixabay) LPG की किल्लत से रोजगार पर संकट, दिल्ली का फूड सेक्टर संकट से गुजर रहा है. (Photo-Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:16 PM IST

दिल्ली में कमर्शियल LPG की कमी ने रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड कारोबार को संकट में डाल दिया है. कई जगहों पर काम के घंटे घटा दिए गए हैं. कई मेनू कम कर दिया गया है. कारोबारियों का कहना है कि गैस की अनियमित सप्लाई ने उनकी कमाई पर सीधा असर डाला है. हालत ऐसी है कि रोज का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है.

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'तड़का रानी' रेस्टोरेंट चेन के एक प्रतिनिधि के मुताबिक, पहले जहां रोजाना करीब 3 लाख रुपए की बिलिंग होती थी, वो अब घटकर महज 25 से 30 हजार रुपए रह गई है. उन्होंने बताया कि फिलहाल वे अपने रेस्टोरेंट के मेनू का केवल 20 फीसदी हिस्सा ही ग्राहकों को दे पा रहे हैं. यहां तक कि खाना भी सीमित मात्रा में तैयार किया जा रहा है.

रेस्टोरेंट संचालकों के सामने सिर्फ गैस की कमी ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन चलाना भी चुनौती बन गया है. बिजली से चलने वाले उपकरण जल्दी गरम हो रहे हैं. कई जगहों पर शुरुआत में आउटलेट पूरी तरह बंद करने पड़े थे. अब भी स्थिति आंशिक रूप से ही सुधरी है, लेकिन नुकसान लगातार बढ़ रहा है. इसके सुधरने के आसार भी नजर नहीं आ रहे.

कमर्शियल LPG की सप्लाई में यह रुकावट वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष से जुड़ी ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं के बीच आई है. सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के प्राथमिकता आवंटन में बदलाव किया है, जिसका असर सप्लाई चेन पर पड़ा है. शाहदरा के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि अब पूरी क्षमता के साथ काम करना संभव नहीं रह गया है. 

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नवरात्रि के दौरान ग्राहकों की संख्या घटने की आशंका ने कारोबारियों की चिंता और बढ़ा दी है. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने कहा कि स्थिति में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं. कई रेस्टोरेंट सिर्फ उन्हीं दिनों खुल पा रहे हैं, जब उन्हें सिलेंडर मिल जाता है. बाकी दिन बंद रहते हैं. 

पूर्वी दिल्ली के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि इस हफ्ते वे सिर्फ दो दिन ही काम कर पाए. संकट का सबसे ज्यादा असर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों पर पड़ा है. दक्षिणी दिल्ली के चाय विक्रेता इकबाल का कहना है कि उन्हें ज्यादातर दिन ठेला बंद रखना पड़ता है. उन्होंने बताया कि आमदनी नहीं होने से रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है.

कई लोग ब्लैक मार्केट से घरेलू सिलेंडर खरीद रहे हैं, जो बहुत महंगा है. इंडियन वर्कर्स अलायंस के संदीप के मुताबिक, मजदूरों और छोटे विक्रेताओं के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि पाबंदियों और जुर्माने के डर के बीच लोग खुलकर काम भी नहीं कर पा रहे हैं. दिल्ली का फूड सेक्टर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. 

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