दिल्ली विधानसभा: गुरूवार से शुरू होगा सत्र, भारत रत्न वापसी के मुद्दे पर हंगामे के आसार

Delhi Assembly session विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि विपक्ष पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग को सदन में पारित प्रस्ताव से असंवैधानिक तरीके से हटा लिए जाने का पुरजोर विरोध करेगा.

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विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की (फोटो-ट्विटर) विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की (फोटो-ट्विटर)

राम किंकर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:14 PM IST

गुरूवार से शुरू होने वाला दिल्ली विधान सभा का सत्र हंगामे दार होगा. विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि भाजपा विधायकों की बैठक में निर्णय लिया गया कि हम सदन की गरिमा हनन और जनहित से जुड़े मुद्दे पुरजोर तरीके से उठाएंगे. हम सरकार को इन महत्वपूर्ण विषयों पर न्यायोचित कार्यवाही करने पर मजबूर करेंगे. बैठक में विधायक ओम प्रकाश शर्मा और जगदीश प्रधान मौजूद थे.

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विधायक दल की बैठक में निर्णय लिया गया कि विपक्ष पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग को सदन में पारित प्रस्ताव से असंवैधानिक तरीके से हटा लिए जाने का पुरजोर विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि 23 दिसम्बर को पारित सम्पूर्ण प्रस्ताव नियमानुसार विधान सभा की कार्यवाही का अविभाज्य अंग बन चुका है. इसके किसी भी भाग को निकाला नहीं जा सकता, लेकिन सरकार ने इसे विधान सभा की कार्रवाई का अंग नहीं मानकर इसे हटा दिया. सरकार ने सदन की गरिमा और मर्यादा भंग कर रही है.

विधायक दल ने जानकारी दी कि विधायक सिरसा ने विधान सभा सचिव को विधान सभा के नियम 245 तथा अनुच्छेद 7(2)(सी) के अंतर्गत विधान सभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाने का नोटिस दिया है. विपक्ष सरकार पर दबाव बनायेगा कि इस नोटिस पर कार्यवाही की जाए.

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विपक्ष दिल्ली सरकार से मांग करेगा कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच लागू होने वाले पांचवें दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्ट को तुरंत सदन की पटल पर रखा जाए, ताकि इनकी सिफारिशों के अनुरूप तीनों नगर निगमों को वित्तीय संसाधन जुटाये जाने का मार्ग प्रशस्त हो. ये सिफारिशें 25 अक्टूबर, 2017 को सौंपी गई थीं, लेकिन आज तक सरकार ने इन्हें सदन में रखने के लिये कोई कदम नहीं उठाया.

विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि विपक्ष मांग करेगा कि सदन सीलिंग को लेकर मॉनीटरिंग कमेटी की तानाशाही भूमिका के विरूद्ध एकजुट होकर विरोध करे. केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली मास्टर प्लान- 2021 में किए गए संशोधनों का लाभ दिल्ली के निवासियों, दुकानदारों, फेक्ट्री मालिकों तथा उद्यमियों को नहीं मिल रहा. मॉनीटरिंग कमेटी अपने आप को सर्वाधिकार सम्पन्न मानकर मनमानी कर रही है. दिल्ली सरकार ने भी अभी तक 721 सड़कों को अधिसूचित नहीं किया है.

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